पुष्य नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में सर्वाधिक शुभ नक्षत्र है इसलिए इस नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव होते हैं लेकिन देव गुरु बृहस्पति को इसका अधिष्ठाता देवता माना जाता है। जब भी गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस बार 25 अगस्त को पुष्य नक्षत्र और गुरुवार का शुभ संयोग बन रहा है l इसके साथ और भी बहुत से शुभ योग इस पुष्य नक्षत्र पर बन रहे है जो इसे विशेष बना रहा है l
1500 साल बाद बन रहे ऐसे शुभ संयोग –
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस 25 अगस्त को गुरु-पुष्य नक्षत्र के संयोग के दिन सूर्य सिंह राशि, गुरु मीन राशि में, शनि मकर राशि में, बुध कन्या राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। ये सभी 5 ग्रह इस दिन स्वंय की राशि में मौजूद रहेंगे जोकि बहुत ही शुभ संयोग है। गुरु-पुष्य नक्षत्र के दिन शनि और गुरु दोनों ग्रह खास तरह का योग भी बना रहे हैं क्योंकि दोनों ग्रह स्वराशि में होने के साथ शनि ग्रह पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं और पुष्य नक्षत्र के देवता गुरु ग्रह हैं l चूंकि पुष्य नक्षत्र पर शनि और गुरु ग्रह का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए इस संयोग का महत्व और भी बढ़ गया है। पिछले 1500 सालों में ऐसी स्थिति में गुरु पुष्य क संयोग नहीं बना।
शुभ मुहूर्त –
पंचांग के अनुसार, पुष्य नक्षत्र का आरंभ 24 अगस्त, बुधवार की दोपहर लगभग 01.38 से होगा, जो अगले दिन यानी 25 अगस्त, गुरुवार की शाम 04.50 तक रहेगा।इस दिन सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि और वरियान नाम के तीन बड़े योग रहेंगे। साथ ही शुभकर्तरी, वरिष्ठ, भास्कर, उभयचरी, हर्ष, सरल और विमल नाम के राजयोग भी बनेंगे। इस तरह दस शुभ योग होने से खरीदारी का महासंयोग बन रहा है।
शुभ मुहूर्त में कर सकते है यह काम –विवाह के आलावा सभी शुभ कार्य इस नक्षत्र में अति शुभ फलदायी बताये गए है l इन दिनों में खरीदारी करना, निवेश, लेन-देन और नई शुरुआत के लिए बहुत ही शुभ माना गया है। रियल एस्टेट में निवेश, वाहन, ज्वैलरी, कपड़े और अन्य चीजों की खरीदारी का अक्षय लाभ मिलेगा। साथ ही घरेलू और ऑफिस में इस्तेमाल की जरूरी चीजें खरीदना भी शुभकारी रहेगा।
सनातन धर्म में कई वैज्ञानिक पद्धतियों को मानव जीवन के अभिन्न और आवश्यक संस्कारों के रूप में शामिल किया गया है, जो वर्तमान में भी उतने ही जीवनोपयोगी और महत्वपूर्ण है l बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए 12 वर्ष तक के बच्चों को सुवर्णप्राशन हिंदू धर्म का एक प्रमुख संस्कार है l सुवर्णप्राशन में शिशुओं को शुद्ध स्वर्ण चटाया जाता है।
यह शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। सुवर्णप्राशन संस्कार पुष्य नक्षत्र में किया जाना सर्वाधिक उपयुक्त होता है। यदि यह संस्कार गुरु पुष्य नक्षत्र या रवि पुष्य नक्षत्र में किया जाए तो और भी अधिक शुभ होता है।