बिनोद गुप्ता सूरजपुर छत्तीसगढ़
सूरजपुर । जिला मुख्यालय के धरोहर के तौर पर विकसित किये गए शिव पार्क की बदहाली चीख चीख कर बया कर रही है। जिस ओर स्थानीय जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे है और ना ही विभाग का ध्यान इस ओर जा रहा है।
सूरजपुर कलेक्टर आवास के चंद कदमो की दूरी पर बना शिव पार्क देख रेख के अभाव में बदहाल है। इस शिव पार्क को विकसित करने बच्चों खेलने कूदने, बुजुर्ग को टाइम पास करने सुध हवा लेने के उद्देश्य से वर्ष 2008 में करीब 5 एकड़ भूमि पर उस वक्त के तात्कालिक राज्यसभा सांसद स्व शिवप्रताप सिंह की पहल पर शिव पार्क की स्थापना की गई। जहाँ सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। शुरुवाती दौर में यह पार्क नगर की शान व पहचान साबित हुई थी। पर समय बीतते गया अधिकारियों की लापरवाही के कारण शिव पार्क के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगने लगा है।

वन विभाग के जिम्मे वाले इस शिव पार्क में वर्तमान के हालात में यहां लाभ बच्चो को मिल पा रहा है और न ही बुजुर्गो को मिल पा रहा है। जबकि शुरुवाती दौर में पार्क जहां बच्चो के किलकारियों से गूंजता था वही बुजुर्ग लोग भी सुबह शाम सैर करते देखे जाते थे। किंतु पार्क में अव्यवथा के कारण न ही बच्चे नजर आते है और न ही बुजुर्ग नजर आते है। यह पार्क ग्राम पंचायतों में वन विभाग द्वारा बनाये गए आवर्ती चराई में तब्दील हो गया है। इंसान के लायक रह नही गया है अलबत्ता यहां विष धर जीव जंतु का अड्डा जरूर बन गया है। जंगली जानवर साथ ही भालू आदि भी गाहे बगाहे डेरा जमा लेते है। जिससे खुद वन विभाग लोगो को दूर रहने की सलाह देता है ताकि कोई हादसा न हो जाये।

पिछले वर्ष नगर में जब भालू घूम रहे थे तब उनका डेरा इसी पार्क में था तब आम लोगो को आने जाने की मनाही थी जिसके फलस्वरूप अब यह लापरवाही की भेंट चढ़ गया। लम्बे समय से न तो साफ सफाई हुई है और न ही झाड़ी आदि की कटाई हुई है। बच्चों केलिए बने खेलने कूदने का सामान के कल पुर्जो मरम्मद के अभाव में खराब हो गया है। तमाम अव्यवस्था के कारण उक्त शिव पार्क अपने अस्तित्व के लिए जदोजहद कर रहा है।
लेकिन इसके इतर इस शिव पार्क में लाखो रुपए खर्च हुए सो अलग है पर इसे आक्सीजोन व साइंस पार्क बनाने के नाम पर लगभग एक करोड़ खर्च किये गए और बकायदे इसका उद्घटान पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के हाथों किया गया था।
इस दोनों पार्क के नाम पर बड़े सपने लोगो को दिखाए गए थे कि यहाँ पहुँचना मतलब आपको प्रदूषण रहित सुध हवा मिलेगा स्वास्थ्य ठीक रहेगा और यहां तमाम ओषधि पोधो का केंद्र होगा। यहाँ तक कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए भी इसे उपयुक्त बनाने का संकल्प था।
लेकिन सारे सपने धाराशाही हो गए कही कोई पार्क नही बल्कि जो था उसका भी हाल बेहाल हो गया है। करोड़ो रूपए डीएमएफ मद की राशि केवल कागजो में खर्च ओर अधिकारियों की जेब गर्म हुई। इस दिशा में किसी ने आज तक कोई पहल नही की है। पहल भी मानो सियासत की भेंट चढ़ गया है। नगर की इस विरासत को सहेजने की दिशा में अभी भी कोई पहल नही हुई जिसके कारण अपने अस्तित्व को खो रहा है। इस सम्बंध में सूरजपुर प्रभारी रेंजर अक्षय लाल कारपेंटर से सम्पर्क करने की कोशिश की गई थी किन्तु मीडिया से दूरी बनाए हुए है।
इस सम्बंध में डीएफओ संजय यादव ने चर्चा करते हुए कहा कि जानकारी मिला है। उसका मरम्मद का कार्य कराया जाएगा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।