इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने OBC की 18 जातियों को SC में शामिल करने के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है। यह नोटिफिकेशन मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और योगी सरकार में जारी हुआ था।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर की डिवीजन बेंच में हुई।हाई कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित वर्ग की सूची में बदलाव का अधिकार केवल देश की संसद को है। केंद्र व राज्य सरकारों को इस सूची में बदलाव का कोई अधिकार संविधान ने नहीं दिया है। एक खास बात यह भी कि राज्य सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह कहा कि उसके पास यह अधिसूचना जारी रखने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत इस दलील के आधार पर ही कोर्ट ने याचिकाएं मंज़ूर कर लीं। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एवं न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने गोरखपुर की डा. भीमराव अंबेडकर ग्रंथालय एवं जन कल्याण समिति की दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है।चुनाव से पहले फैसला21-22 दिसंबर, 2016 ः अखिलेश यादव सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इन जातियों के लिए दो अधिसूचनाएं जारी कीं। कुछ दिन बाद ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थगन दे दिया।
24 जून, 2019 ः योगी सरकार ने हाईकोर्ट के एक फैसले का गलत संदर्भ लेते हुए नई अधिसूचना जारी की। इस पर भी हाईकोर्ट ने स्थगन दे दिया था।वर्ष 2005 ः मुलायम सिंह यादव सरकार ने भी इन जातियों को एससी में शामिल किया था। हाईकोर्ट ने रोक लगाई, तो सरकार ने फैसला वापस ले लिया था।