नई दिल्ली:– अमरावती। दुनिया भर में सोने की बढ़ती मांग के बीच भारत के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आंध्र प्रदेश में करीब 50 टन सोने का विशाल भंडार मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह राज्य देश का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बन सकता है। इस खोज से न केवल घरेलू सोना उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि विदेशों से सोने के आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
चार नई जगहों पर भी मिली संभावनाएं
माइंस विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि जोन्नागिरी के अलावा रामागिरी, जव्वकुला, चिगुरुकुंटा और बिस्नाटम क्षेत्रों को भी गोल्ड माइनिंग के लिए संभावित स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में खनिज संपदा की विस्तृत जांच और सर्वेक्षण का काम किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार सरकार इन खनिज समृद्ध क्षेत्रों के विकास और व्यावसायिक उपयोग की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
1,500 एकड़ क्षेत्र में होगा सर्वे
जानकारी के अनुसार, जोन्नागिरी क्षेत्र में करीब एक दशक पहले गोल्ड माइनिंग के लिए 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। अब तक केवल 500 एकड़ क्षेत्र में ही सर्वे और खोज का काम हुआ है। शुरुआती रिपोर्ट में यहां लगभग 13 टन सोने की संभावना जताई गई थी, लेकिन आगे की जांच में पूरे क्षेत्र में 50 टन तक सोना मिलने का अनुमान लगाया गया है।
बाकी 1,000 एकड़ भूमि में भी जल्द विस्तृत सर्वेक्षण और माइनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री करेंगे माइनिंग परियोजना का शुभारंभ
अधिकारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू इसी महीने के अंत में जोन्नागिरी गोल्ड माइनिंग परियोजना का औपचारिक शुभारंभ कर सकते हैं। इसके बाद यहां व्यावसायिक स्तर पर खनन गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
सोना निकालना आसान नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की खदान मिलने का मतलब यह नहीं कि तुरंत बड़ी मात्रा में सोना निकलने लगेगा। सोना निकालने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और महंगी होती है। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में एक टन खनन सामग्री की प्रोसेसिंग के बाद औसतन सिर्फ एक ग्राम सोना ही प्राप्त हो पाता है।
पहले जहां एक टन अयस्क से करीब तीन ग्राम सोना निकल जाता था, वहीं अब गुणवत्ता और भंडार की स्थिति के कारण उत्पादन चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी वजह से सरकार निजी कंपनियों की भागीदारी के जरिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की योजना बना रही है।
भारत में क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में हर साल करीब 800 टन सोने की मांग रहती है, जबकि घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है। वर्ष 2000 में कर्नाटक की प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद होने के बाद देश में सोने का उत्पादन काफी कम हो गया था।
फिलहाल कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइन्स ही देश की प्रमुख सक्रिय स्वर्ण खदान है, जहां से सालाना करीब 1.5 टन सोने का उत्पादन होता है। ऐसे में आंध्र प्रदेश में मिले नए भंडार को देश की खनन और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि अनुमान सही साबित होते हैं और व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के सोना उत्पादन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
