नई दिल्ली:– पश्चिम एशिया में तनाव के कारण बढ़ती महंगाई का असर अब सूखे मेवे और खाद्य तेल के कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दो माह में सूखे मेवों की कीमत में 100 रुपये प्रति किलो और खाद्य तेलों की कीमतों में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि महंगे सिलिंडर, परिवहन खर्च और आयात पर निर्भरता के कारण कीमतों में तेजी बनी हुई है। इससे कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
ईरान और अन्य देशों से आने वाले माल की ढुलाई महंगी हो गई है। कंटेनर भाड़ा और आयात शुल्क में हुए बदलाव का भी बाजार पर असर दिखाई दे रहा है। वैसे तो कई व्यापार पर इसका असर पड़ालेकिन खासतौर पर पिस्ता और बादाम के दामों में तेजी की बड़ी वजह विदेशी बाजारों में बढ़ी कीमतें मानी जा रही हैं।
किराना व्यापारी अरविंद गुप्ता के मुताबिक, इस समय बादाम 1000 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि, करीब 15 दिन पहले इसका भाव लगभग 920 रुपये प्रति किलो था। जनवरी से मई के बीच वादाम के दाम 920 से 1020 रुपये प्रति किलो के बीच रहे।
पिस्ता 1200 से 1300 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि यही रेट दो माह पूर्व सौ रुपये कम था। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में आने वाला अधिकांश पिस्ता और बादाम ईरान और अमेरिका से आयात होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का असर सीधे कीमतों पर पड़ता है।
काजू साबुत की कीमत 800 से 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं, अखरोट के दाम कुछ कम हुए हैं। इस समयजहां 600 से 800 रुपये प्रति किलो विक रहा है। फरवरी में अखरोट का भाव 700 से 900 रुपये प्रति किलो तक चला गया था। हालांकि आगे दाम और बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
तीन माह में ऐसे बढ़े खाद्य तेलों के दाम
खाद्य तेलों की बात करें तो दो-तीन माह पूर्व की अपेक्षा वर्तमान में करीब पांच प्रतिशत तक दाम में उछाल दर्ज किया गया है। कारोबारी अशोक अरोरा के अनुसार, सरसों का तेल के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में सरसों तेल 170 से 175 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि जनवरी में इसका भाव करीब 160 रुपये प्रति किलो था।
रिफाइंड तेल की कीमत भी जनवरी के 160 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि रिफाइंड तेल का बाजार काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है।
सहालग के बाद बाजार की रौनक रह गई आधी
सहालग के बाद बाजार की रौनक आधी रह गई है। इसके पीछे महंगाई बढ़ने के कारण ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है। घरेलू गैस सिलिंडर बढ़ने से आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। लोग जरूरत भर ही खरीदारी कर रहे हैं।
