नई दिल्ली:– अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की खबर है और जल्द ही इस समझौते का आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि अब तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से समझौते की पुष्टि नहीं की है।
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर सबसे बड़ी शर्त
ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के सामने पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मुद्दा ईरान के हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने करीब 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे। पश्चिमी देशों का मानना है कि इस स्तर का यूरेनियम भविष्य में परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी चालू रखने की मांग
अमेरिका ने ईरान से यह भी कहा है कि वह केवल एक परमाणु सुविधा को संचालित रखे जबकि बाकी न्यूक्लियर गतिविधियों पर रोक लगाए। इसके अलावा अमेरिका युद्ध के दौरान हुए नुकसान की किसी भी तरह की आर्थिक भरपाई करने के पक्ष में नहीं है।
फ्रीज फंड पर अब भी फंसा मामला
संभावित समझौते में ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों का मुद्दा भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने फिलहाल इन फंड्स को रिलीज करने से इनकार कर दिया है। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी अड़चनों में से एक माना जा रहा है।
सीजफायर और सुरक्षा गारंटी पर चर्चा
डील के ड्राफ्ट में सुरक्षा से जुड़ा एक अहम क्लॉज भी शामिल बताया जा रहा है। इसके तहत अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान या उसके समर्थित गुटों पर हमला नहीं करेंगे। बदले में ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ कोई प्रीएम्प्टिव अटैक नहीं करेगा। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में जारी संघर्षों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है।
ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें
दूसरी ओर ईरान ने भी बातचीत के अगले चरण के लिए पांच शर्तें रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को वापस करना और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा शामिल है। इसके अलावा ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग भी उठाई है।
कैसे बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव?
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद करीब 40 दिनों तक तनाव और सैन्य कार्रवाई जारी रही। बाद में 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ। इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत और ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, जिसके बाद अब संभावित समझौते की तस्वीर सामने आने लगी है।
जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान
माना जा रहा है कि यदि दोनों पक्ष अंतिम बिंदुओं पर सहमत हो जाते हैं तो आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति समझौते का ऐलान किया जा सकता है। इस डील का असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
