नई दिल्ली:– पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और योगगुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को करीब 15 साल पुराने फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून की विशेष CBI अदालत ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
यह मामला भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़ा था। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण को राहत मिली है।
CBI के मुताबिक, आचार्य बालकृष्ण ने पासपोर्ट बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के खुर्जा स्थित एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इन दस्तावेजों के आधार पर बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किए जाने का आरोप था।
इसी मामले में CBI ने संबंधित धाराओं और पासपोर्ट अधिनियम के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ यह मामला करीब 15 साल पहले 2011 में सामने आया था। CBI ने फर्जी दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी की टीम वाराणसी पहुंची और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को लेकर जानकारी जुटाई।
विश्वविद्यालय की ओर से कथित तौर पर CBI को बताया गया था कि आचार्य बालकृष्ण द्वारा प्रस्तुत हाईस्कूल और ग्रेजुएशन से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल हैं।
जांच के दौरान CBI की टीम खुर्जा स्थित राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय भी पहुंची थी। एजेंसी ने दस्तावेजों की जांच में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर दर्ज रोल नंबरों को लेकर कथित विसंगतियां मिलने का दावा किया था।
CBI के अनुसार, जिस हाईस्कूल प्रमाणपत्र में रोल नंबर 6118 दर्ज था, वह रिकॉर्ड में कमला सिंह पुत्र नरोत्तम सिंह के नाम से जुड़ा बताया गया। वहीं दूसरे दस्तावेज में दर्ज रोल नंबर 101706 लीला प्रसाद भट्टाराई पुत्र टेक प्रसाद भट्टाराई के नाम से संबंधित बताया गया था।
इन्हीं जांच निष्कर्षों के आधार पर CBI ने आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की आगे जांच की थी।
मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। करीब डेढ़ दशक बाद अब देहरादून की विशेष CBI अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत के इस फैसले से आचार्य बालकृष्ण को 15 साल पुराने मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के प्रमुख पदाधिकारियों में शामिल हैं और बाबा रामदेव के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। पतंजलि से जुड़े विभिन्न संस्थानों और गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट से जुड़े इस पुराने मामले में अदालत का फैसला ऐसे समय आया है, जब आचार्य बालकृष्ण लंबे समय से इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे।
