पश्चिम बंगाल :– बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नजर पंजाब विधानसभा चुनाव पर है। भाजपा ने पंजाब में आम आदमी पार्टी को शिकस्त देने के लिए अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पंजाब जीतने के लिए पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदारी सौंपी है। इन दिनों पंजाब की राजनीति के बदलते समीकरण भाजपा को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह पंजाब में भाजपा नेताओं की अहम बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में ड्रग्स विरोधी अभियान को लेकर बातचीत की जा सकती है। पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। ऐसे में अमित शाह जनसंपर्क अभियान के तहत ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता फैलाने के मजबूत संदेश दे सकते है।
BJP ने अकेले चुनाव लड़ने का किया ऐलान
इस बार आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। भाजपा अपने दम पर पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। भाजपा पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी और शिरोमणी अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
भाजपा घर-घर पहुंचकर बूथ लेवल पर जनता से संपर्क बना रही है। इस दौरान पंजाब में बीजेपी के राजनीतिक समीकरणों में केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। हालांकि, अभी तक भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया है। माना जा रहा है कि वे 21 जून से पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव में उतारा जा सकता है। संभावना है रवनीत सिंह बिट्टू चुनाव लड़ सकते है।
आप के बगावती सांसदों से भी होगा फायदा
पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजाप ने 117 सीटों में से 38 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई थी। हालांकि, बहुमत के लिए 59 सीटों के आंकड़े से यह 21 सीटें दूर रह गई। इसलिए इस बार अमित शाह ने पंजाब को लीड करने की जिम्मेदारी खुद ली है।
बता दें, कि हाल ही में राघव चड्ढा के साथ-साथ 6 अन्य सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का हाथ थामा था। यह बगावत भी पंजाब में भाजपा को जीताने में अहम भूमिका निभा सकती है।
