पश्चिम बंगाल :– 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच ने उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण में 152 निर्वाचन क्षेत्रों के 1,475 उम्मीदवारों को शामिल किया गया।
इस रिपोर्ट के परिणाम बताते हैं कि राजनीति में धनशक्ति और अपराधीकरण का प्रभाव काफी गहरा है। रिपोर्ट के अनुसार, 66 निर्वाचन क्षेत्रों को ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है क्योंकि वहां तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।
19 पर हत्या और 6 पर दुष्कर्म के आरोप
पहले चरण के उम्मीदवारों में अपराधियों की संख्या डराने वाली है। कुल विश्लेषण किए गए उम्मीदवारों में से 345 (23 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले और 294 (20 प्रतिशत) पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 19 उम्मीदवारों पर हत्या और 105 पर हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, 98 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले हैं, जिनमें से 6 उम्मीदवारों पर दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप हैं।
दागी उम्मीदवारों में बीजेपी और करोड़पतियों में टीएमसी आगे
राजनीतिक दलों के बीच तुलना करें तो आपराधिक मामलों की सूचना देने में भाजपा सबसे आगे है।
भाजपा (BJP): 152 में से 106 उम्मीदवारों (70%) पर आपराधिक मामले और 63% पर गंभीर आरोप हैं।
सीपीएम (CPI-M): 98 में से 43 उम्मीदवारों (44%) पर आपराधिक मामले और 37% पर गंभीर आरोप हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC): 148 में से 63 उम्मीदवारों (43%) पर आपराधिक मामले और 32% पर गंभीर आरोप हैं।
कांग्रेस (Congress): 151 में से 39 उम्मीदवारों (26%) पर आपराधिक मामले और 22% पर गंभीर आरोप हैं।
जाकिर हुसैन 133 करोड़ के साथ सबसे अमीर
पहले चरण में कुल 309 (21 प्रतिशत) उम्मीदवार करोड़पति हैं और प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति 1।34 करोड़ रुपये है। संपत्ति के मामले में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सबसे संपन्न हैं, जिनके 72% उम्मीदवार करोड़पति हैं और उनकी औसत संपत्ति 5।70 करोड़ रुपये है। भाजपा के 47% और कांग्रेस के 33% उम्मीदवार करोड़पति की श्रेणी में आते हैं। जंगीपुर से टीएमसी के जाकिर हुसैन 133 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। वहीं, रुबिया बेगम और सुशृता सारेन जैसे उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने अपनी कुल संपत्ति महज 500 और 700 रुपये घोषित की है।
शिक्षा, उम्र और महिला कैंडिडेट्स की डिटेल्स
उम्मीदवारों की प्रोफाइल पर नजर डालें तो शैक्षणिक स्तर और उम्र में काफी अंतर है। 48 प्रतिशत उम्मीदवार कक्षा 5वीं से 12वीं के बीच शिक्षित हैं, जबकि 47 प्रतिशत उम्मीदवार ग्रैजुएशन या उससे अधिक डिग्री धारक हैं। 14 उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो निरक्षर हैं। 53 प्रतिशत उम्मीदवार 41 से 60 वर्ष की उम्र के हैं, जबकि 31 प्रतिशत 25 से 40 वर्ष के युवा हैं। दो उम्मीदवार 80 वर्ष से अधिक आयु के भी मैदान में हैं। लैंगिक प्रतिनिधित्व के मामले में स्थिति अब भी कमजोर है, पहले चरण के कुल उम्मीदवारों में महिलाएं केवल 11 प्रतिशत (167) ही हैं।
