कोरबा पाली :– बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ का शिमला कहलाने वाला चैतुरगढ़ इन दिनों अपने सबसे मनमोहन और रमणीय स्वरूप में नजर आ रहा है। सरपंच दिलाराम नेताम ग्राम पंचायत पुटा जनपद पंचायत पाली बताते हैं कि कोरबा जिले से लगभग 90 किलोमीटर दूर तथा पाली विकासखंड मुख्यालय से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां महिषासुर मर्दिनी का प्राचीन मंदिर कोहरे और हरियाली की चादर में लिपटा हुआ एवं पर्यटकों को मंत्र मुक्त कर रहा है।

जुलाई माह के मानसूनी मौसम में चैतुरगढ़ का दृश्य किसी स्वार्गिक लोक से काम नहीं दिखाई देता। भोर होते ही पूरा क्षेत्र घने कोहरे से ढंक जाता है, और मंदिर का शिखर बादलों को चूमता प्रतीत होता है। धुंध के बीच लहराती लाल ध्वजा तथा मंदिर के समीप विराजमान सिंह प्रतिमाएं मानों मां के द्वारपाल बनकर श्रद्धालुओं का स्वागत करती नजर आती है।
सूर्योदय के बाद जैसे-जैसे कोहरा छटता है वैसे वैसे चारों ओर फैली हरियाली का अद्भुत दृश्य सामने आता है। घने! जंगल हरी हरी पहाड़ियां और खुले आसमान के बीच स्थित मां महिषासुर मर्दिनी का मंदिर किसी चित्रकार की अनुपम कृति जैसा प्रतीत होता है मानसून की फूहार ने यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं।
क्षेत्रवासियों,श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्तमान मौसम में चैतुरगढ़ पहुंचाना केवल दर्शन नहीं बल्कि एक अविस्मरणीय अनुभव है। यहां की ठंडी हवाएं बादलों से ढकी घटिया, हरियाली से आच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं और दूर-दूर तक फैले प्राकृतिक दृश्य जीवन भर याद रह जाते हैं। मंदिर तक पहुंचाने के लिए पहाड़ी पर बने घुमावदार रास्ते और सीढ़ियां रोमांस का अलग ही एहसास करते हैं।

सरपंच ग्राम पंचायत पुटा जनपद पंचायत पाली जिला कोरबा दिलाराम नेताम बताते हैं कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम समेटे चैतुरगढ़ को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। यहां भीषण गर्मी में भी तापमान सामान्यतः 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है जबकि सावन भादो के महीने में मौसम और अधिक सुहावना हो जाता है। यही कारण है की इन दिनों यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी हो जाती है तथा प्रति सप्ताहांत बड़ी संख्या में लोग दर्शन और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
चैतुरगढ़ में चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के दौरान विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से श्रद्धालु मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
मानसूनी मौसम में चैतुरगढ़ का नजारा देखकर सहज ही महसूस होता है कि मानो बादलों के बीच मां का दिव्या दरबार सजा हो और पैरों तले हरियाली का अथाह बिस्तर बिछा हो। यही अनुपम दृश्य चैतुरगढ़ को सबसे आकर्षक धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों में शुमार कर रहा है।।

सरपंच दिलाराम नेताम बताते हैं कि:-- बादलों की ओढ़नी और हरियाली के श्रृंगार से सजा 3000 फीट ऊंचाई पर स्थित मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर, मानसून में स्वर्गिक आभा बिखेरता चैतुरगढ़
