नई दिल्ली:– संकटहर्ता विघ्नहर्ता भगवान गणेश की उपासना करने से मनुष्य के समस्त शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। बता दें कि हर महीने में दो बार चतुर्थी पड़ती है। एक बार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी जिसे वैनायिकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। दूसरी बार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जिसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से संकटों से मुक्ति मिलती है। मनुष्य की समस्त मनोकामना पूरी होती है।
संकष्टी पूजा का समय
सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 01 अगस्त की रात को 11 बजकर 07 मिनट से होगी।
इसका समापन 2 अगस्त को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार सावन संकष्टी चतुर्थी 2 अगस्त को मनाई जाएगी।
इस दिन विधिवत भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों को विशेष लाभ मिलता है और उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा और मंत्रोच्चारण करने से भक्तों को धन, ऐश्वर्य और वैभव की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं किन मंत्रों से होते हैं भगवान गणेश प्रसन्न और क्या है उपाय।
श्री गणेश मंत्र
वक्रतुंड महाकाय मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश ध्यान मंत्र
गजाननं भूतगणादिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं
नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
विघ्नेश्वर स्तुति
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय
लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥
मयूरेश स्तुति
पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम्।
भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
ज्ञान प्रदायक मंत्र
सर्वाज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम्।
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
श्री गणेश स्तुति
वन्दौं श्री गणपति पद, विघ्नविनाशन हार। पवित्रता की शक्ति जो, सब जग मूलाधार ।।
हे परम ज्ञान दाता, सकल विश्व आधार। क्षमा करें वर दें, विघ्नों से करें उबार ।।
है जग वंदन, हे जगनायक! हे गौरीनंदन! हे वरदायक ।।
हे विघ्नविनाशन! हे गणनायक! हे भवभय मोचन! हे जन सुखदायक! ।।
दया करो हे प्रभु! दे सबको निर्मल ज्ञान। हे सहज संत! दें हम को यह वरदान ।।
मंगलमय हो गीत हमारे करें जनकल्याण। मातृप्रेम में निरत रहें पावें पद निर्वाण ।।
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। प्रातः काल स्नान करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। फूल, माला, अक्षत चढ़ाकर गणेश भगवान की पूजा करें और आरती उतारे। भगवान को मोदक अत्यधिक प्रिय है। मोदक का भोग लगाएं और दूर्वा अर्पित करें। इससे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। मनुष्य के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
भगवान गणेश को संकटहर्ता कहे जाने की पीछे एक पौराणिक कथा है। एक बार भगवान शिव और माता पार्वती जंगल में चौपड़ का खेल खेल रहे थे। दोनों अकेले थे। इसलिए मां पार्वती ने कहा कि हार और जीत का निर्णय करने के लिए किसी तीसरे का होना आवश्यक है। इसलिए उन्होंने माटी की एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। चौपड़ के खेल में उस बालक ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
गलती से एक बार माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया। जिससे क्रोधित होकर माता पार्वती ने उसे श्राप दे दिया और वह बालक लंगड़ा हो गया। बालक के क्षमा मांगने पर माता पार्वती ने कहा कि- दिया हुआ श्राप तो वापस नहीं हो सकता है, लेकिन अगर तुम गणेश की प्रार्थना करो तो तुम्हारे संकट जरूर दूर हो जाएंगे। तभी से ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की प्रार्थना करने से शारीरिक और मानसिक संकट दूर हो जाते हैं।
