बलरामपुर। छत्तीसगढ़ से लगे झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में तीन वर्ष बाद बाघ दिखा है।यह बाघ छत्तीसगढ़ का है।छत्तीसगढ़ के गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान से निकला यह बाघ बलरामपुर जिले से होते हुए पलामू टाइगर रिजर्व में पहुंचा है।यहां चालीस ट्रेप कैमरे भी लगाए गए हैं।बलरामपुर जिले में 21 दिनों तक रहने के बाद बाघ अब झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के कुटकू रेंज में देखा गया। यह रेंज झारखंड के गढ़वा जिले में बूढ़ापहाड़ के नजदीक है।
बूढ़ा पहाड़ कभी नक्सलियों के प्रभाव वाला शरणस्थली माना जाता था लेकिन बाघ के पहुंचने के बाद अब वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की सक्रियता क्षेत्र में बढ़ गई है।क्षेत्र में 16 मार्च से बाघ देखा जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा सूचित किए जाने पर टाइगर रिजर्व के अधिकारी, कर्मचारी क्षेत्र में पहुंचे है। बाघ की ट्रैकिंग शुरू की गई है। इसका फोटो ट्रैप कैमरे में आने के साथ ही अधिकारियों ने भी अपने कैमरे में खींचे हैं। पलामू टाइगर रिजर्व के मंडल डैम से कुछ दूर आगे जंगल में बाघ मौजूद है। उसने शनिवार को एक बैल मारा था।शिकार वाले स्थान पर ही बैठकर रविवार को बैल को खाते हुए भी बाघ को देखा गया है।
झारखंड के कुटकू रेंज में बाघ होने की सूचना मिलने के बाद ट्रैकरों के साथ पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेश कांत जेना जंगल में पहुंचे है। उन्होंने अपने कैमरे में बाघ की तस्वीर ली है। इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक कुमार आशुतोष को सूचना दी। पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक भी पहुंचे और बाघ को देखा। कुमार आशुतोष ने भी रविवार को अपने कैमरे में बाघ को कैद किया। बाघ पर नजर रखने के लिए जंगल में टेंट लगा कैंप बनाया गया है।
लाइटिंग के लिए जनरेटर भी लगाया गया है। अधिकारी और ट्रैकर कैंप में रह कर बाघ पर नजर रख रहे हैं। टाइगर रिजर्व के निदेशक कुमार आशुतोष का दावा है कि बाघ ट्रैप कैमरे में भी दिखा है।जंगल में 40 कैमरे लगाए गए हैं।आवश्यकता के अनुरूप कैमरे की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जीपीएस आधारित फोटो मुहैया करने से इंकार कर दिया उनका कहना है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा नहीं किया जा सकता है। एक तो बाघ की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी और दूसरा इलाके के लोग दहशत में आ जाएंगे। पलामू टाइगर रिजर्व में तीन वर्ष से बाघ नहीं दिखा था।
छत्तीसगढ़ से जाने के बाद बाघ के देखे जाने के बाद पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारी, कर्मचारी गदगद हैं। प्रयास है कि बाघ रिहायशी क्षेत्रों में न पहुंचे। वह पलामू टाइगर रिजर्व एरिया में ही रहे।तीन वर्षों से बाघ की उपस्थिति नहीं होने से पलामू टाइगर रिजर्व के औचित्य पर भी खतरा मंडरा रहा था। बाघ बलरामपुर जिले में 23 फरवरी से 15 मार्च तक 21 दिनों तक था।
संभावना है कि बाघ मध्यप्रदेश के सीधी या बांधवगढ़ से चलकर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़, गुरु घासीदास नेशनल पार्क बैकुंठपुर, तमोर पिंगला सूरजपुर होते हुए बलरामपुर- रामानुजगंज जिला में आया था। 21 दिनों तक जिले में रहने के बाद बाघ ने झारखंड में प्रवेश किया है।बाघ ने जितने मवेशियों का शिकार किया है उसके एवज में नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि पशु मालिकों को दे दी गई है।