मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आखिरकार बीएमसी में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है, जिसे नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने उजागर किया है. कथित घोटाले ज्यादातर कोविड-19 महामारी के दौरान नागरिक प्रशासन द्वारा की गई खरीदारी से संबंधित हैं. एसआईटी की निगरानी मुंबई के पुलिस आयुक्त विवेक फनसालकर करेंगे और इसमें आर्थिक अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त शामिल होंगे.
बीजेपी उम्मीद कर रही है कि एसआईटी जांच से महामारी के दौरान हजारों करोड़ रुपये के ठेके देने में शामिल आपराधिकता का पर्दाफाश होगा, जिसमें कथित तौर पर शिवसेना (यूबीटी) के कुछ वरिष्ठ नेता और उनके सहयोगी शामिल थे. बीजेपी लंबे समय से बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर टेंडरिंग नियमों को दरकिनार कर करोड़ों रुपये बनाए हैं.
प्रारंभ में, नगर आयुक्त आईएस चहल ने इस आधार पर कैग ऑडिट का विरोध किया था कि महामारी अधिनियम के तहत लिए गए निर्णयों पर कानूनी रूप से सवाल नहीं उठाया जा सकता है. हालांकि, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया और कैग जांच के आदेश दिए.SIT इस मामले की भी करेगी जांचचहल ने सहायक आयुक्त महेश पाटिल और मनीष वालुंज के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को अनुमति देने से भी इनकार कर दिया था.
पता चला है कि एसआईटी सहायक आयुक्त शरद उगाधे की भी जांच करेगी. शहर बीजेपी प्रमुख और विधायक आशीष शेलार और पार्टी विधायक अमित साटम लगातार “भ्रष्ट” अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. सूत्रों ने कहा कि पुलिस जांच के डर से कुछ अधिकारियों ने पहले ही अपने मोबाइल नष्ट कर दिए हैं.पता चला है कि कैग बीएमसी से जुड़े मामलों पर दूसरी रिपोर्ट भी पेश कर सकता है.