नई दिल्ली:- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली विधानसभा में CAG की रिपोर्ट पेश किया. साथ वह पिछली सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग में की गई गड़बड़ी का लेखा जोखा भी सामने रखा.
केंद्रीय गृह मंत्रालय में गृहमंत्री अमित शाह की आगुवाई में दिल्ली की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर बैठक खत्म हो चुकी है. सीएम रेखा गुप्ता बैठ के बाद पत्रकारों को संबोधित किया. साथ ही उन्होंने बताया कि बैठक में क्या-क्या बात हुई. उन्होंने बताया कि ये बैठक सबसे ज्यादा दिल्ली की महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस में रही.
शीला दीक्षित के बाद पहली बार दिल्ली सरकार के गृह मंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री और दिल्ली पुलिस के साथ गृह मंत्रालय में इस तरह की मीटिंग हो रही है. इस बैठक में दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के आला अधिकारी शामिल होंगे. यह मीटिंग सुबह 11 बजे होगी. मीटिंग में दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत दिल्ली पुलिस के सभी स्पेशल कमिश्नर मौजूद रहेंगे. मीटिंग में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली के गृह मंत्री अशीष सूद भी मौजूद रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस में सामंजस्य बना रहे, इसको लेकर ये मीटिंग हो रही है. दिल्ली की कानून व्यवस्था की बेहतरी को लेकर दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार मिलकर कैसे काम करे इस पर भी होगी चर्चा.
दिल्ली विधानसभा में आज कैग रिपोर्ट पेश किया जाएगा. सदन के अंदर और बाहर घमासान मचा हुआ है. जहां विपक्ष के 22 में से 21 सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दिल्ली की रेखा गुप्ता की नई नवेली सरकार अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान घोटालों की गुणा भाग में लगी हुई हैस लगातार कैग का रिपोर्ट पेश किया जा रहा है. जहां गुरुवार को सीसीटीवी कैमरों को लगाने में स्कैम को लेकर सदन चर्चा चली तो आज स्वास्थ्य घोटालों पर कैग की रिपोर्ट पेश की जाएगी.
दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा, ‘वे कोविड-19 के दौरान 700 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल थे. सभी घोटालों की जांच की जाएगी. CAG रिपोर्ट के बाद किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. हमारी सरकार उचित कार्रवाई होगी.’
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में CAG रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा पेश किया. इसमें स्वास्थ्य सेवाओं का लेखाजोखा है. दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई. इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही.
