कोरबा:– घटिया भोजन प्रताड़ना के आरोप और कार्यवाही में तेरी पर फूटा गुस्सा: हाईवे जाम होते ही हरकत में आया प्रशासन अधीक्षक हटाई गई*
उपरोड़ा जिला छात्रावास का उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित वातावरण पौष्टिक भोजन और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है वही की छात्राएं अपनी पीड़ा लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर आई कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं ने अंबिकापुर बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया। आरोप है कि छात्रावास में लम्बे समय से घटिया भोजन दिया जा रहा था और शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। छात्राओं ने अधीक्षिका पर गंभीर आरोप भी लगाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतें पहले से मिल रही थी तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब तक मौन रहे? क्या छात्राओ को न्याय दिलाने के लिए हाईवे जाम करना ही आखिरी रास्ता था।
छात्राओं का आरोप है कि अधीक्षिका शारदा नेताम उनसे निजी मालिश करने का दबाव बनाती थी और मना करने पर छात्रावास से निकलने की धमकी देती थी कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि रात में अनाधिकृत व्यक्तियों का आना जाना हुआ करता था इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी होना बाकी है लेकिन इन दावों ने छात्रावास की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्राओं के सड़क पर बैठते ही अंबिकापुर बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। खंड शिक्षा अधिकारी तहसीलदार जिला शिक्षा अधिकारी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे काफी समझाइश के बाद भी छात्राएं नहीं मानी और स्पष्ट कहा कि अधीक्षिका को हटाए बिना वह आंदोलन समाप्त नहीं करेंगी।
आखिरकार जिला प्रशासन को अधीक्षिका को हटाने का निर्णय लेना पड़ा आदेश की जानकारी मिलने के बाद छात्राओं ने सड़क खली की और यातायात बहाल हो सका।
सबसे बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक छात्रावास का विवाद नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की गंभीर असफलता का संकेत है यदि छात्राओं की शिकायतें पहले सुनी जाती तो क्या राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने जैसी नौबत आती शिकायतों पर कार्यवाही किस स्तर पर अटकी रही क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिक की भी जांच होगी या करवाई केवल अधीक्षिका तक सीमित रह जाएगी?
जांच के घेरे में कई सवाल: क्या पूर्व में मिली शिकायतों का रिकार्ड मौजूद है छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच हुई या नहीं छात्राओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कौन करेगा निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की जिम्मेदारियों की भी जांच होगी।
कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की यह घटना शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है बेटियों का सड़क पर उतरना केवल विरोध नहीं बल्कि व्यवस्था से न्याय की गुहार है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन केवल स्थानांतरण तक सीमित रहता है या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई करता है।
