नई दिल्ली:- केंद्र सरकार पीएम-कुसुम योजना के नए संस्करण पीएम-कुसुम 2.0 को जल्द लांच करने की तैयारी में है। इस नई योजना से फलों और सब्जी उत्पादक किसानों को खास तौर पर फायदा होने की उम्मीद है।
नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय फिलहाल इस योजना का कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है जिस पर अन्य सभी मंत्रालयों से विमर्श के बाद अगले कुछ हफ्तों के भीतर ही मंजूरी मिलने की संभावना है।
फल-सब्जी उगाने वाले किसानों को होगा फायदा
नई योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पैनल लगा कर 10 हजार मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य होगा। इसमें खास तौर पर किसानों को अपनी फसलों के ऊपर ऊंचे स्ट्रक्चर पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे खेती-किसानी को रोके बिना ही बिजली उत्पादन होगा और फल-सब्जी बागान वाले किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित होगी।
किसानों को दोहरी आय का मौका
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एग्री-पीवी सिस्टम में पैनल कम से कम 2.1 मीटर ऊंचे लगाए जाएंगे, जिससे फसलों को पर्याप्त धूप और छाया दोनों मिलेगी। टमाटर, बैंगन, पपीता, आम जैसी फसलें छाया में बेहतर विकसित होती हैं। किसानों को दोहरी आय का मौका मिलेगा क्योंकि फसल बिक्री के साथ सोलर पावर बेचकर मासिक कमाई भी कर सकेंगे। बड़ी जोत के किसान लाखों रुपये सालाना की अतिरिक्त कमाई करने की क्षमता रखेंगे।
उक्त सूत्रों ने बताया कुसुम 2.0 का एक खास लक्ष्य यह भी होगा कि देश में खेती कार्यों में डीजल पंपों का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया जाए। मौजूदा डीजल आधारित सिंचाई को सौर ऊर्जा से पूरी तरह बदलने से किसानों को दिन-रात मुफ्त या बेहद सस्ती बिजली मिलेगी। इसका सीधा फायदा राज्य सरकारों को भी होगा क्योंकि उन पर बिजली सब्सिडी का बोझ कम होगा।
नई योजना का कुल आउटले लगभग 50,000 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो मौजूदा योजना से करीब 45 प्रतिशत अधिक है। इसमें विकेंद्रीकृत सोलर, फीडर लेवल सोलराइजेशन और बैटरी स्टोरेज पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि रात के समय भी बिजली उपलब्ध रहे। वर्ष 2019 में लांच मौजूदा पीएम-कुसुम योजना की प्रगति मिश्रित रही है।
आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, कंपोनेंट-ए में 10,000 मेगावाट लक्ष्य के मुकाबले 1,052.95 मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता ही स्थापित हो सकी है। फीडर लेवल सोलराइजेशन में 35.13 लाख पंपों में से 14.24 लाख सोलराइज्ड हो पाये हैं। कुल मिलाकर योजना ने 21.77 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाया है, लेकिन लक्ष्यों से काफी पीछे है। वित्तीय, ग्रिड और जागरूकता संबंधी चुनौतियों के कारण पहली फेज लक्ष्य से कम रही, जिसे देखते हुए 2.0 में सुधार की तैयारी की जा रही है।
