नई दिल्ली:- भारतीय हिंदू परंपरा में घर में सुबह-शाम दीपक जलाना और भगवान के सामने प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। दीपक का प्रकाश घर से अंधकार और नकारात्मकता को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
पूजा-पाठ में दीपक केवल रोशनी के लिए नहीं, बल्कि भगवान के समक्ष जलाया जाने वाला दीपक भक्त की आस्था और श्रद्धा से जुड़ी होती है। दीपक जलाते समय तेल, घी, बत्ती और उसकी दिशा को लेकर भी कुछ नियम बताए गए है, जिसका पालन हर किसी को करना चाहिए।
पूजा में सबसे पहले जलाएं दीपक
किसी देवी-देवता की पूजा शुरू करने से पहले अग्नि के सम्मान में दीपक जलाया जाता है। इसके बाद मुख्य देवी-देवता की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि पूजा के दौरान दीपक की लौ स्थिर और लगातार जलती रहे तो यह शुभ संकेत होता है। दीपक की रोशनी को मां लक्ष्मी की कृपा और घर की समृद्धि से जोड़ा जाता है।
घी का दीपक या तेल का?
पूजा में शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाना विशेष माना गया है। मान्यता है कि घी का दीपक वातावरण को शुद्ध, खुशनुमा और शांत बनाता है। वहीं, अलग-अलग पूजा पद्धति में तेल के दीपक का भी अपना महत्व है। मिलावट को देखते हुए कई घरों में तेल का दीपक जलाया जाता है। दूसरी ओर, शनि महाराज की पूजा के लिए सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है।
एक दीपक में कितनी बत्तियां रखें?
पारंपरिक रूप से एक दीपक में दो बत्तियां रखकर उन्हें एक लौ की तरह जलाने की बात कही जाती है। वहीं, बहुबत्ती वाले दीपक में तीन या पांच बत्तियां रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में हमेशा विषम संख्या को विशेष महत्व दिया जाता है।
दीपक किस दिशा में रखें?
वास्तु के अनुसार दीपक की दिशा का भी विशेष महत्व है। पारंपरिक रूप से पूजा में तेल का दीपक देवी-देवता की बाईं ओर और घी का दीपक दाईं ओर रखी जानी चाहिए। उत्तर दिशा की ओर लौ रखने से धन-संबंधी परेशानियां दूर होने और समृद्धि बढ़ती है। वहीं, पूर्व दिशा की ओर दीपक की लौ रखना भी शुभ होता है।
पूजा के बीच दीपक बुझ जाए तो घबराएं नहीं
कभी हवा या किसी अन्य वजह से पूजा के दौरान दीपक बुझ जाता है। इसे लेकर घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। मन ही मन भगवान से क्षमा मांगकर दीपक को दोबारा से जलाया जा सकता है। अगर आरती के दौरान दीपक हाथ से गिर जाए, तो भगवान का नाम लेकर शांति पाठ करने की सलाह दी जाती है।
तुलसी के पास दीपक रखते समय ध्यान रखें
शाम की पूजा में तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाई जाती है। मान्यता है कि दीपक को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उसके नीचे अक्षत यानी चावल रखने चाहिए। अक्षत को पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और इसे मां लक्ष्मी से जोड़ा जाता है।
