छत्तीसगढ़:– एमसीबी जिले में मानसून की बेरुखी अब किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है। पिछले 10 से 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल सूखने लगी है, खेतों में दरारें पड़ गई हैं और रोपाई का काम लगभग ठप हो गया है। खेती के साथ-साथ खेतिहर मजदूरों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। किसान अब अच्छी बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
खरीफ सीजन के बीच एमसीबी जिले में बारिश की लंबी बेरुखी ने खेती-किसानी पर संकट खड़ा कर दिया है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने धान की बोवाई तो कर दी, लेकिन लगातार बारिश नहीं होने से अंकुरित फसलें मुरझाने लगी हैं। कई खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जबकि जिन किसानों ने अभी तक बोवाई नहीं की है, वे आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से बादलों का इंतजार कर रहे हैं।
बारिश नहीं होने का असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि खेतिहर मजदूरों पर भी पड़ रहा है। धान की रोपाई रुकने से मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश होने पर ही खेतों में काम शुरू होगा और मजदूरी मिल पाएगी। बारिश की कामना को लेकर गांवों में लोग देवगुड़ी और भगवान शंकर के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि ईश्वर की कृपा से जल्द अच्छी बारिश होगी और किसानों की फसल बच जाएगी।
ग्राम पंचायत के सरपंच सुमेर बैगा का कहना है कि क्षेत्र में 10 से 15 दिनों से बारिश नहीं हुई है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से धान की अंकुरित फसल भी सूखनेटी लगी है और यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग ने भी माना है कि बारिश की कमी से धान की रोपाई प्रभावित हुई है। विभाग ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाज की खेती के लिए शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी है।
यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव केवल किसानों की आय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र और खेतिहर मजदूरों की आजीविका भी प्रभावित होगी। फिलहाल एमसीबी का अन्नदाता आसमान की ओर टकटकी लगाए झमाझम बारिश का इंतजार कर रहा है।
