नई दिल्ली:- हिंदू धार्मिक परंपराओं में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से पूजा, मंत्र जाप और दान करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से भी माना जाता है।
प्रचलित रूप से ‘अचूक उपाय’ कहे जाने वाले ये कार्य आस्था और परंपरा से जुड़े हैं। इन्हें करते समय महंगी सामग्री या बड़े आयोजन की आवश्यकता नहीं होती। अपनी सामर्थ्य के अनुसार की गई पूजा, घर की स्वच्छता, जरूरतमंद की सहायता और परिवार के प्रति अच्छा व्यवहार इस दिन की साधना का हिस्सा बन सकते हैं।
सुबह घर और पूजा स्थल की सफाई करें
शुक्रवार की सुबह घर की सफाई से दिन की शुरुआत करें। विशेष रूप से पूजा स्थान, मुख्य द्वार और रसोई को व्यवस्थित रखें। पूजा के पास रखे मुरझाए फूल और अनुपयोगी सामग्री हटा दें। धार्मिक मान्यता में स्वच्छता को मां लक्ष्मी की आराधना से जोड़ा जाता है।
घर में बिखरी हुई जरूरी वस्तुओं को उनकी जगह पर रखें। सफाई का काम केवल एक व्यक्ति पर छोड़ने के बजाय परिवार के सदस्य मिलकर करें। साफ और व्यवस्थित वातावरण पूजा में मन लगाने तथा रोजमर्रा के काम सहज ढंग से करने में मदद करता है।
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा करें
सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और शांत मन से मां लक्ष्मी का स्मरण करें। परंपरा के अनुसार सफेद, गुलाबी या हल्के रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। किसी विशेष रंग का नया कपड़ा खरीदना आवश्यक नहीं है।
पूजा के दौरान कुछ समय मोबाइल और दूसरे व्यवधानों से दूर रहें। मन में चल रही चिंताओं को थोड़ी देर के लिए विराम देकर आराधना करें। अपने परिवार के साथ दूसरों के सुख और कल्याण की भी प्रार्थना करें।
मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करें
घर के पूजा स्थान में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर पूजा कर सकते हैं। उपलब्ध सामग्री के अनुसार जल, फूल और भोग अर्पित करें। श्रद्धानुसार धूप या दीप जलाएं।
पूजा में अपनी किसी कमी को स्वीकार करते हुए उसे सुधारने का संकल्प भी लें। किसी से कटु शब्द कहे हैं तो संबंध सुधारने की कोशिश करें। धार्मिक आचरण को रोजमर्रा के व्यवहार से
