मध्य प्रदेश :– वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर है। प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के बिल का भुगतान UPI के जरिए नहीं किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है।
एसोसिएशन के मुताबिक नई व्यवस्था प्रदेश के सभी करीब 4,700 पेट्रोल पंपों पर लागू होगी। ऐसे में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करने वाले वाहन चालकों को UPI के बजाय अन्य उपलब्ध भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करना होगा।
MDR चार्ज को बताया फैसले की वजह
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि ईंधन को रियायती श्रेणी में रखे जाने के कारण 2,000 रुपये से ज्यादा के प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये का समान MDR लिया जा रहा है। इस पर 18 प्रतिशत GST जुड़ने के बाद प्रति लेनदेन 5.90 रुपये का अतिरिक्त खर्च पेट्रोल पंप संचालकों पर पड़ रहा है।
एक पंप पर हर महीने 17,400 रुपये का अतिरिक्त बोझ
एसोसिएशन ने इस खर्च का आंकड़ा भी बताया है। अजय सिंह के मुताबिक एक औसत पेट्रोल पंप पर रोजाना 2,000 रुपये से अधिक के करीब 100 UPI ट्रांजेक्शन होते हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 590 रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है। महीने में यह राशि लगभग 17,400 रुपये हो जाती है। एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों को मिलाकर यह अतिरिक्त बोझ हर महीने करीब 8.17 करोड़ रुपये बैठता है।
डिजिटल पेमेंट लेने की कानूनी बाध्यता नहीं
डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि वैध मुद्रा यानी नकद भुगतान स्वीकार करने से इनकार करना कानूनी रूप से गलत है, लेकिन डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए पंप संचालकों पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। इसी आधार पर एसोसिएशन ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान को बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि, छोटे मूल्य के UPI भुगतान को लेकर इस फैसले में रोक की बात नहीं कही गई है।
तेल कंपनियों से MDR का खर्च उठाने की मांग
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालन में कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल और दूसरे खर्च लगातार बने रहते हैं। ऐसे में अतिरिक्त MDR का बोझ पंप संचालकों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है। एसोसिएशन की मांग है कि MDR की राशि तेल कंपनियों को खुद वहन करनी चाहिए। डीलर्स का कहना है कि कम मार्जिन और बढ़ते खर्च के बीच अतिरिक्त शुल्क का बोझ उठाना उनके लिए मुश्किल है।
