नई दिल्ली:– जैसे-जैसे सूर्य देव के तेवर तीखे हो रहे हैं और पारा 40 डिग्री के पार जाने को बेताब है, संस्कारधानी के लोग अब फ्रिज के कृत्रिम ठंडे पानी और कार्बोनेटेड साफ्ट ड्रिंक्स से किनारा करने लगे हैं।
किराना स्टोर से लेकर आटा चक्कियों तक भीड़
इस भीषण गर्मी में शहरवासी अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए सदियों पुराने ‘पारंपरिक आयुर्वेद’ और ‘देसी खान-पान’ की ओर लौट रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों शहर के किराना स्टोर से लेकर आटा चक्कियों तक, ‘सत्तू’ की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।
जबलपुर के लार्डगंज, गढ़ा और रांझी के किराना व्यापारी बोले- इस साल सत्तू की मांग पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक है। लोग मिलावट के डर से अब ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट बंद सत्तू के बजाय खुद अपनी निगरानी में इसे तैयार करवाना पसंद कर रहे हैं।
लोग चने खरीदकर चक्की में पिसवा रहे
किराना स्टोरों पर भुने हुए चने और चने की दाल की बिक्री बढ़ गई है। लोग चने खरीदकर उसे स्थानीय चक्की में पिसवा रहे हैं। चक्की संचालक बोले- 15 दिनों में सत्तू की पिसाई के काम में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। ग्राहकों का मानना है कि घर पर तैयार सत्तू न केवल शुद्ध होता है, बल्कि उसकी खुशबू और स्वाद भी बाजार वाले सत्तू से कहीं बेहतर होता है।
