नई दिल्ली:– आजकल फास्ट फूड का जमाना है ना ? पिज्जा, बर्गर खा-खाकर पेट भर रहा है ! लेकिन, हमारी छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू वाली अंगाकर रोटी (जिसे पनपुरवा रोटी भी कहते हैं) फिर से जोर-शोर से वापसी कर रही है। महासमुंद जिले के सरायपाली वाले डमरूधर नायक भैया रायपुर में डीडी नगर, मानसरोवर भवन के सामने अपना नाश्ता केंद्र चलाकर पुरखों की परंपरा को जिंदा कर रहे हैं। चार साल से ये सिलसिला चल रहा है, और अब लोगों की पहली पसंद बन गया है।
अंगाकर रोटी में क्या है खास ?
पुराने समय में गांव के किसान-मजदूर सुबह ये मोटी-मजबूत रोटी खाकर दिन भर खेत में मेहनत करते थे। एक बार खा लो तो भूख घंटों नहीं लगती – पूरी ताकत देती है!
- कैसे बनती है: चावल, उड़द दाल, गेहूं, ज्वार-बाजरा का आटा मिलाकर गूंथा जाता है। फिर पारंपरिक तरीके से – नीचे आग, ऊपर गरम कोयला डालकर धीरे-धीरे पकाई जाती है। इसी से आता है वो लाजवाब स्वाद और पौष्टिकता!
और साथ में वो टमाटर-हरी मिर्च-धनिया की सिलबट्टे पर पीसी चटनी – अरे वाह! चखते ही जीभ पर झुनझुनी छा जाती है। दूर-दूर से लोग सिर्फ इसी चटनी के लिए आते हैं। ठंड के मौसम में तो स्पेशल बनती है ये
डमरूधर भैया कहते हैं – “ये सिर्फ खाना नहीं, हमारी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जिंदगी और पुरखों की विरासत है। शहर में इसे फिर से लोकप्रिय बनाने के लिए ये पहल की है।”
कीमत भी एकदम जेब के अनुकूल
- पूरा तवा रोटी: 100 रुपये
- आधा तवा: 50 रुपये
- चौथाई: 25 रुपये
हर कोई आसानी से खा सके, इसलिए ऐसे दाम रखे हैं। रोजाना 250 रोटियां बिक रही हैं! साथ में मिलेट की चीला रोटी भी मिलती है, लेकिन अंगाकर की डिमांड सबसे ज्यादा।
इस नाश्ता केंद्र से न सिर्फ हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि 6-7 लोगों को रोजगार भी मिल गया है। डमरूधर भैया की लगन देखकर लगता है – अगर दिल से परंपरा को बचाओ, तो शहर में भी देसी स्वाद राज कर सकता है। पिज्जा-बर्गर छोड़ो, अगली बार रायपुर आओ तो डीडी नगर जरूर घूमना। अंगाकर रोटी चखकर देखो – मजा ऐसा आएगा कि बार-बार मन करेगा! हमारी छत्तीसगढ़ की शान को जिंदा रखो।
