नई दिल्ली:– भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तरी और मध्य भारत में भीषण लू की चेतावनी जारी की है। चिलचिलाती धूप और लगातार चलने वाली गर्म हवाओं ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे लोग मौसम की इन चरम स्थितियों में जूझने को मजबूर हैं। पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। तेज़ धूप और गर्म हवाओं (लू) के कारण ‘हीटस्ट्रोक’ (लू लगने) के मामले बढ़ने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और हल्के सूती कपड़े पहनें। इस सलाह के बावजूद, कुछ ज़रूरी काम सुबह देर से या दोपहर के समय किए जाते हैं, जिसके कारण हीटस्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं।
हीटस्ट्रोक तब होता है, जब अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से शरीर का तापमान 40°C से ऊपर चला जाता है। यह आमतौर पर गर्म मौसम में लंबे समय तक बाहर रहने, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने, या धूप में रहकर कोई ज़ोरदार शारीरिक गतिविधि करने के बाद होता है। इसके आम लक्षणों में चक्कर आना, सिरदर्द, जी मिचलाना, दिल की धड़कन तेज़ होना, भ्रम की स्थिति, त्वचा का रूखा होना, मांसपेशियों में ऐंठन और बेहोशी शामिल हैं। गंभीर मामलों में, व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति में हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो प्राथमिक उपचार के तौर पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए? क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, किसी व्यक्ति को हीटस्ट्रोक होने पर तुरंत कुछ ज़रूरी कदम उठाए जाने चाहिए: किसी ठंडी जगह पर ले जाएँ: प्रभावित व्यक्ति को तुरंत घर के अंदर या किसी छायादार और हवादार जगह पर ले जाएँ। भीड़भाड़ वाली या गर्म जगहों से दूर रखें। शरीर का तापमान कम करें: गर्दन, कांख (बगल), माथा और जांघों के जोड़ (ग्रोइन) वाले हिस्से पर गीले कपड़े, ठंडे स्पंज या आइस पैक का इस्तेमाल करें। शरीर को तेज़ी से ठंडा करने में मदद के लिए आप व्यक्ति को लगातार पंखा भी कर सकते हैं।
तुरंत पानी पिलाएँ: अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे थोड़े-थोड़े घूंट करके ठंडा पानी, ORS, नींबू पानी या इलेक्ट्रोलाइट वाला पेय पदार्थ पिलाएँ। कैफीन वाले या शराब वाले पेय पदार्थों से परहेज़ करें। कपड़े ढीले करें: शरीर में हवा का संचार बेहतर करने और उसे ठंडा रखने के लिए, व्यक्ति के शरीर पर से अतिरिक्त कपड़े हटा दें और उसे आराम की मुद्रा में रखें। तुरंत डॉक्टरी मदद लें: अगर लक्षण और बिगड़ते हैं, व्यक्ति बेहोश हो जाता है, उसे बार-बार उल्टी होती है, या उसे सांस लेने में तकलीफ़ होती है, तो बिना किसी देरी के आपातकालीन डॉक्टरी सहायता लें।
