नई दिल्ली:–:भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे उत्तर भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 19 जून तक छिटपुट बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। इस बदलाव से पिछले कई दिनों से जारी लू का प्रभाव कम होने की उम्मीद है।
पश्चिमी विक्षोभ का दिखेगा असर
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 19 जून तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। पहाड़ों में हो रही इस हलचल का असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ेगा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलेगी।
तापमान में उतार-चढ़ाव का गणित
हालांकि बारिश से राहत मिलने के आसार हैं, लेकिन मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिम भारत में 17 जून तक दिन के तापमान में 4-6 डिग्री सेल्सियस तक की धीरे-धीरे बढ़ सकता है। फिलहाल अभी पश्चिमी यूपी और मध्य क्षेत्रों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में अभी भी स्थिति गंभीर है, जहां पारा 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि पूर्वी राजस्थान में आंधी और बारिश से राहत मिलने की संभावना है।
मुंबई में मानसून का टूटता रिकॉर्ड और जल संकट
एक तरफ जहां उत्तर भारत में प्री-मानसून का असर दिखना शुरू हो गया है, वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मानसून का पुराना ट्रेंड टूटता नजर आ रहा है। जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश नहीं हुई है। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों में जल भंडारण की क्षमता 10 प्रतिशत से भी कम रह गई है।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
अगर बात मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की करें तो यहां 17 जून तक तापमान स्थिर रहने की उम्मीद है। देश के अन्य हिस्सों में भी 19 जून तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि 19 जून के बाद मानसून की सक्रियता बढ़ने से देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में और अधिक गिरावट आएगी, जिससे आम जनजीवन को भीषण गर्मी से पूरी तरह निजात मिल सकेगी।
