नई दिल्ली:- छत्रपति संभाजीनगर में जन्म के तुरंत बाद एक नवजात की मौत हो गई। खबर के अनुसार, नवरात्रि के दौरान धार्मिक मान्यता का हवाला देते हुए माता-पिता ने मृत बच्चे को छूने से इनकार कर दिया। इसके बाद श्मशानभूमि के कर्मचारियों ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।
जन्म के तुरंत बाद नवजात की मौत
छत्रपति संभाजीनगर में एक नवजात की मौत के बाद ऐसी घटना सामने आई, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। खबर के अनुसार, नौ महीने तक गर्भ में रहने के बाद जन्मे बच्चे ने दुनिया में आते ही दम तोड़ दिया। इसके बाद माता-पिता ने धार्मिक मान्यता का हवाला देते हुए बच्चे के शव को अंतिम बार छूने से भी इनकार कर दिया।
बताया गया कि नवरात्रि के दौरान बच्चे को छूने की परंपरा नहीं होने की बात कहकर माता-पिता पीछे हट गए। ऐसे में नवजात के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, यह सवाल खड़ा हो गया।
श्मशानकर्मियों ने निभाई अंतिम विदाई
माता-पिता के इनकार के बाद श्मशानभूमि में काम करने वाले कर्मचारियों ने आगे आकर नवजात के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। जिस बच्चे ने जन्म के तुरंत बाद दुनिया छोड़ दी, उसकी अंतिम विदाई के लिए परिवार की ओर से कोई आगे नहीं आया। अंततः श्मशानकर्मियों ने ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।
घटना ने संवेदनशील सवाल उठाए
नवरात्रि त्योहार के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बीच सामने आई इस घटना ने धार्मिक मान्यताओं और मानवीय संवेदनाओं को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, परिवार की परिस्थितियों, धार्मिक मान्यता और निर्णय के पीछे की वजहों के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए घटना के सभी पहलुओं को समझे बिना परिवार के फैसले पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नवजात की मौत अपने आप में परिवार के लिए दुखद घटना है। इस मामले में माता-पिता के निर्णय और अंतिम संस्कार से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अधिक जानकारी की आवश्यकता है।
