भोपाल:- सत्तारूढ़ भाजपा को कांग्रेस से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भगवा पार्टी में आंतरिक कलह भी बढ़ रहा है। 15 महीने पुरानी कमल नाथ सरकार को छोड़कर, भाजपा दो दशकों से राज्य में सत्ता में है। पिछले चार विधानसभा चुनावों में सबसे दिलचस्प मुकाबला 2018 में देखने को मिला, जब बीजेपी सत्ता से बेदखल हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में 22 विधायकों के भाजपा में चले जाने के बाद राज्य में कांग्रेस सरकार गिर गई और भाजपा एक बार फिर सत्ता में आई। बीजेपी अपने चुने हुए प्रतिनिधियों का रिपोर्ट कार्ड बना रही है, लेकिन इसका नतीजा बहुत सुखद नहीं है, इसलिए पार्टी इनमें से कई के टिकट काट सकती है।
कुछ को टिकट मिलने और कुछ के न छूटने को लेकर पार्टी कैडर में टकराव की स्थिति पैदा हो रही है। वे एक-दूसरे को सबक सिखाने की कोशिश कर रहे हैं, पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। बुन्देलखण्ड के सागर जिले में पिछले कई सालों से शिवराज कैबिनेट में मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह और गोविंद सिंह के बीच अपने प्रभाव को लेकर शीत युद्ध चल रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने जब मंत्रियों को शांत कराया तो यह टकराव खुलकर सामने आ गया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश में करीब दो दशक से बीजेपी की सरकार है और जब भी कोई पार्टी इतने लंबे समय तक सत्ता में रहती है, तो उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ता है।