नई दिल्ली:- चावल भारतीय खानपान का एक अहम हिस्सा है, लेकिन आजकल सफेद चावल के साथ Black Rice की भी चर्चा बढ़ रही है। इसका गहरा बैंगनी-काला रंग इसे बाकी चावल से अलग बनाता है, लेकिन इसकी खासियत सिर्फ रंग नहीं है। Black Rice में एंथोसायनिन, फेनोलिक कंपाउंड्स और डाइटरी फाइबर जैसे कई बायोएक्टिव न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। जिनकी वजह से इसे न्यूट्रिंशन युक्त आहार माना जाता है। इसमें फाइबर भी पाया जात है, जिससे पाचन तंत्र में सुधार होने और बार-बार खाने की आदत से छुटकारा मिलता है। फिलहाल इसके अन्य फायदों को लेकर अभी और रिसर्च जारी है।
Black Rice क्या है और इसका रंग इतना गहरा क्यों होता है?
एनसीबीआई के अनुसार ब्लैक राइस यानी काला चावल एक पिगमेंटेड वैरायटी का चावल है। इसके बाहरी परत में एंथोसायनिन की मात्रा अधिक होती है। यही प्राकृतिक पिग्मेंट्स इसे गहरा बैंगनी या ब्लैक रंग देते हैं। पकाने के बाद इसका रंग अक्सर गहरा बैंगनी दिखाई देता है।
काले चावल में खास तौर पर साइनाइडिन-3-ग्लूकोसाइड और पियोनीडिन-3-ग्लूकोसाइड जैसे एंथोसायनिन पाए जाते हैं। अलग-अलग वैरायटी में इन कंपाउंड्स की मात्रा अलग हो सकती है। एनसीबीआई के अनुसार रिसर्च में ब्लैक राइस को व्हाइट राइस की तुलना में अधिक फिनोलिक कंपाउंड्स (phenolic compounds) और एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी वाला पाया गया है। यानी इसका काला या बैंगनी रंग सिर्फ देखने की खूबसूरती नहीं है, बल्कि इसके अंदर मौजूद प्लांट कंपाउंड्स का संकेत भी है।
सफेद चावलों से ब्लैक राइस न्यूट्रिशन में कितना अलग है?
व्हाइट राइस को पॉलिश करने के दौरान बाहरी परत और ब्रान का काफी हिस्सा हट जाता है। ब्लैक राइस की वैरायटी में बाहरी पिग्मेंटेड लेयर मौजूद रहने के कारण इसमें कुछ ऐसे कंपाउंड्स अधिक मात्रा में बने रह सकते हैं जो पॉलिश्ड व्हाइट राइस में कम होते हैं।
एनसीबीआई के अनुसार एक रिव्यू में ब्लैक राइस में डाइटरी फाइबर, आवश्यक अमीनो एसिड्स, विटामिन्स, मिनरल्स, फिनोलिक कंपाउंड्स, एंथोसायनिन और अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाए जाते हैं। सफेद चावल की तुलना में काले चावल का पोषण प्रोफाइल अधिक विविध हो सकता है, हालांकि सटीक पोषण विविधता, प्रोसेस्टड करने और खाना पकाने के तरीके पर निर्भर करता है।
क्या ब्लैक राइस में ज्यादा फाइबर होता है?
आमतौर पर ब्लैक राइस की कम-पॉलिश्ड या पिग्मेंटेड वैरायटी में व्हाइट राइस की तुलना में डाइटरी फाइबर अधिक हो सकता है। एनसीबीआई के अनुसार ब्लैक राइस को डाइटरी फाइबर का अच्छा सोर्स बताया गया है। हालांकि, “कितना ज्यादा” यह चावलों की वैरायटी और प्रोसेसिंग पर निर्भर करता है।
ब्लैक राइस को वेट लॉस फूड कहना सही नहीं होगा, लेकिन इसमें मौजूद फाइबर और अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड्स इसे बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा बनाने का कारण दे सकते हैं। कुछ रिसर्च में ब्लैक राइस या उसके एसट्रक्टर के मेटाबॉलिक और मोटापे से जुड़े प्रभावों की जांच की गई है।
एनसीबीआई के अनुसार एक 12 सप्ताह के ट्रायल में मोटापे वाली पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं में ब्लैक राइस एसट्रैक्ट लेने वाले ग्रूप में पेट की चर्बी, टोटल फैट और बॉडी फैट प्रतिशत में कमी देखी गई। हालांकि बॉडी वेट, बीएमआई और कमर की चौड़ाई में औसतन अंतर नहीं मिला। इसलिए इसे सीधे “ब्लैक राइस खाने से वजन कम होता है” कहना एविडेंस से ज्यादा दावा होगा।
डायबिटीज और ब्लड शुगर के लिए ब्लैक राइस कैसा है?
एनसीबीआई के अनुसार ब्लैक राइस और ब्लड शुगर के बीच संबंध पर रिसर्च तेजी से बढ़ रही है। इसके एंथोसायनिन और अन्य पॉलिफिनोल कार्बोहाइड्रेट डाइजेशन तथा ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म से जुड़े पाथवेस को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ स्टडी में पिग्मेंटेड राइस खाने के बाद पोस्ट मील ग्लूकोज रिस्पॉन्स व्हाइट राइस की तुलना में कम पाया गया
एनसीबीआई के मुताबिक 2026 में प्रकाशित एक स्टडी में अलग-अलग चावलों की वैरायटी के ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच की गई। उसमें टेस्टेड ब्लैक राइस का GI 49, जबकि टेस्टेड व्हाइट राइस का GI 71 था। हालांकि अलग वैरायटी और कुकिंग प्रक्रिया में GI काफी बदल सकता है, इसलिए किसी एक स्टडी के आधार पर हर ब्लैक राइस को लॉ-जीआई मानना सही नहीं होगा।
ब्लैक राइस का गहरा रंग एंथोसायनिन की मौजूदगी से आता है और इसमें सफेद चावल की तुलना में कई बायोएक्टिव कंपाउंड्स और आमतौर पर अधिक डाइटरी फाइबर पाए जा सकते हैं। रिसर्च में ब्लड शुगर रिस्पॉन्स, एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी, बॉडी फैट और कार्डियोमेटाबॉलिक हेल्थ को लेकर संभावित फायदे सामने आए हैं, लेकिन सभी फायदे को लेकर क्लीनिकल एविडेंस अभी मजबूत या पर्याप्त नहीं है। इसलिए ब्लैक राइस को बैलेंस्ड डाइट का न्यूट्रिशन विकल्प समझें, किसी बीमारी का इलाज या वेट लॉस शॉटकट नहीं।
