नई दिल्ली:- संन्यासी अखाड़ों में से प्रमुख आवाहन अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री एवं कुंभ मेला प्रभारी श्री महंत सत गिरि महाराज दिव्य भव्य कुंभ बनाने की तैयारी के लिए त्रंबकेश्वर स्थित आवाहन अखाड़े में एक हफ्ते के प्रवास पर पहुंचे इस दौरान उन्होंने अखाड़े में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के साथ आगामी कुंभ को लेकर शासन प्रशासन और सरकार से समन्वय के लिए वार्ता भी की आवाहन अखाड़े में नवभारत से विशेष बातचीत के दौरान कुंभ और त्रंबकेश्वर को लेकर उनका कहना है कि त्र्यंबकेश्वर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि सनातन धर्म की चेतना का वह जाग्रत केंद्र है जहाँ साक्षात् देवाधिदेव महादेव विराजमान हैं।
त्र्यंबकेश्वर की पवित्र पावन भूमि और महाकुंभ अमृत स्नान: मोक्ष का परम मार्ग
नासिक जिले में गोदावरी नदी के उद्गम स्थल (ब्रह्मगिरि पर्वत) की तलहटी में बसा यह पावन धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय स्थान रखता है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव तीन विग्रहों (पिंडियों) के रूप में निवास करते हैं। इसी पावन भूमि पर जब सिंहस्थ महाकुंभ का योग बनता है, तो धरा पर साक्षात् स्वर्ग उतर आता है।
अमृत स्नान अलौकिक वैभव और साधना की पराकाष्ठा
कुंभ मेले का सबसे दिव्य, भव्य और मुख्य आकर्षण होता है। अमृत स्नान। इसे ‘राजयोगी स्नान’ भी कहा जाता है। शाही स्नान के दिन संपूर्ण त्र्यंबकेश्वर नागा संन्यासियों, अखाड़ों के महामंडलेश्वरों, साधु-संतों और तपस्वियों के शंखनाद, डमरू की ध्वनि और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठता है।
संतों का आगमन और नगर प्रवेश4
कुंभ के प्रारंभ शुरुआत अखाड़ों के पारंपरिक जुलूस (पेशवाई) से होती है। संन्यासी अपने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों, ढोल-नगाड़ों और सोने-चांदी के हौदों पर विराजमान होकर कुशावर्त कुंड की ओर बढ़ते हैं। कुशावर्त कुंड का महत्व: त्र्यंबकेश्वर में शाही स्नान मुख्य रूप से कुशावर्त कुंड में होता है।
मान्यता है कि महर्षि गौतम ने इसी कुंड को कुशा (घास) से घेरकर गोदावरी के वेग को रोका था। शाही स्नान के दिन सबसे पहले अखाड़ों के साधु-संत इस कुंड में डुबकी लगाते हैं, उसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मार्ग खुलता है। 3. मोक्ष की प्राप्ति: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ के दौरान गोदावरी और कुशावर्त कुंड में एक बार डुबकी लगाने से करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
