नई दिल्ली:– कर्नाटक के कोट्टूर इलाके में 27 जनवरी की वह रात किसी को नहीं पता था कि मामूली से दिखने वाले किराए के घर में मौत का तांडव होने वाला है। अक्षय कुमार, जिसे आस-पड़ोस के लोग एक मेहनती युवक के रूप में जानते थे, उस पर अपने ही पिता भीमराज, मां ज्यालक्ष्मी और बहन अमृता की बेरहमी से हत्या करने का आरोप लगा है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि भरोसे और खून के रिश्तों की सबसे वीभत्स हार है।
आरोपी ने सिर्फ हत्या ही नहीं की, बल्कि क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए तीनों शवों को घर के परिसर में ही गड्ढा खोदकर दफना दिया। कई दिनों तक वह उसी घर में सामान्य तरीके से रहता रहा, जबकि चंद फीट नीचे उसका पूरा परिवार मिट्टी में दबा हुआ था। यह सोचकर ही सिहरन पैदा होती है कि कोई इंसान उस जमीन पर कैसे सो सकता है जिसके नीचे उसने अपने ही माता-पिता की लाशें दबाई हों
खुद पुलिस के पास पहुंचा कातिल
अक्षय ने अपराध करने के बाद खुद को बचाने के लिए शातिर साजिश रची। वह बेंगलुरु गया और वहां तिलक नगर पुलिस स्टेशन में अपने परिवार की गुमशुदगी दर्ज कराई। उसने पुलिस को यकीन दिलाने की कोशिश की कि उसका परिवार गायब हो गया है। मगर, कहते हैं कि जुर्म अपनी गवाही खुद दे देता है। जब पुलिस ने उससे बारीकी से पूछताछ की तो उसके बदलते बयानों ने उसकी पोल खोल दी।
क्या झूठी शान बनी कत्ल की वजह?
शुरुआती जांच में जो कारण निकलकर सामने आ रहे हैं, वे समाज की एक कड़वी हकीकत को दर्शाते हैं। बताया जा रहा कि अक्षय अपनी बहन अमृता के किसी युवक के साथ प्रेम संबंधों के खिलाफ था। जब माता-पिता ने बीच-बचाव करने या अक्षय को समझाने की कोशिश की तो उसका गुस्सा बेकाबू हो गया। महज विरोध और गुस्से में आकर उसने एक झटके में अपना पूरा संसार ही खत्म कर दिया।
जांच और इंसाफ की उम्मीद
विजयनगर पुलिस की कप्तान जाह्नवी और उनकी टीम अब इस मामले की हर कड़ी को जोड़ रही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से सबूत जुटाए जा रहे हैं। अक्षय को अब उसी जगह ले जाया जाएगा, जहां उसने अपने हाथों से अपनों को दफन किया था। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर एक बेटा इतना पत्थरदिल कैसे हो सकता है? क्या आपसी संवाद की कमी और गुस्सा इतना बड़ा हो सकता है कि वह जन्म देने वालों के खून का ही प्यासा हो जाए?
