मध्य प्रदेश:- आदिवासी बाहुल्य धार जिले में लापरवाहियों का आलम जारी है. गुरुवार की सुबह हुए दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर लापरवाही का वही आलम देखने को मिला. पिकअप वाहन से बच्चों को मजदूरी करने के लिए ले जाया जा रहा था. पिकअप वाहन में लगभग 50 मजदूर शामिल थे जिसमे नाबालिक बच्चें भी शामिल थे जिन्हे छुड़वाया गया ड्राइवर भी नाबालिक हीं लग रहा था
आदिवासी बाहुल्य धार जिले में लापरवाहियों का आलम जारी है. गुरुवार की सुबह धार के लिए बहुत अंधेरी रही, जिला अस्पताल में सुबह से एक के बाद एक एम्बुलेंस शवों को बारी-बारी ले जाने लगी. पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर एक दो नहीं पुरी 16 एम्बुलेंस एक के बाद एक शव लेकर रवाना हुई. पोस्टमार्टम रुम के बाहर हर किसी की आंखों में आंसू थे. जिले के अमझेरा थाना इलाके के कई गांवों में, जिसमें सेमलीपुरा, सुल्तानपुर और नयापुरा की गलियों में सन्नाटा पसरा था. बुधवार रात हुए भीषण सड़क हादसे ने 16 जिंदगियों को निगल लिया, शनिवार शाम को एक और घायल मजदूर शारदा पति नरसिंह निवासी आंबापुरा की एमवाय अस्पताल में मौत हो गई. अभी भी 25 मजदूर घायल है और अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहे है.
हादसे में मौत का आंकड़ा हुआ 17
पिकअप जिसमें मासूम बच्चों सहित कुल 46 मजदूर मजदूरी करके अपने घर लौट रहे थे लेकिन तिरला थाना अंतर्गत पेट्रोल पंप के पहले क्रॉसिंग डिवाइडर पर वाहन अनियंत्रित होकर चढ़ा और सड़क पर दूसरी लाइन में तीन पलटी खा गया और मजदूरों से भरी गाड़ी सड़क पर बिखर गई. आनन फानन में मृतकों और घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया जहा शुरुआत में 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई देर रात तक आंकड़ा 16 तक पहुंच गया, अब यह बढ़कर 17 हो चूका है।. शमशान छोटा पड़ा तो खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार नयापुरा गांव में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत ने पुरे गांव को गमगीन कर दिया. पहली बार गांव में एक साथ इतनी मौत हुई इतने सारे शव एक साथ आने से श्मशान घाट छोटा पड़ गया, तो सभी चिताएं खुले आसमान के नीचे जलानी पड़ीं.
बिखर गया पूरा परिवार
नयापुरा के मुन्नालाल डावर परिवार पर सबसे बड़ा आघात हुआ. उनके यहां से सात सदस्यों की अर्थियां निकलीं—पति-पत्नी, दो युवा और तीन बच्चे. पूरा परिवार खत्म हो गया. गांव वाले बताते हैं कि मुखाग्नि देते वक्त आंखों के सामने अंधेरा छा गया था. एक ही परिवार के इतने सदस्यों को चिता पर चढ़ते देख लोग फूट-फूटकर रो पड़े. पिकअप में 46 लोग मौजूद थे. हादसा का प्रमुख कारण वाहन अनियंत्रित होना बताया गया है लेकिन वाहन की क्षमता महज 15-20 लोगों की ही थी. बुधवार रात चालक का नियंत्रण छूटा और पिकअप तेजी से पलट गई. सड़क पर लाशें बिखरी पड़ी थीं. स्थानीय लोगों में गुस्सा फूट पड़ा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा नहीं, लापरवाही का नतीजा है. पुरानी पिकअप में भेड़-बकरियों की तरह लोगों को भरकर ले जाया जाता था. आरटीओ और पुलिस की चेकिंग सिर्फ कागजों में रह जाती है. ओवरलोडेड वाहनों पर अक्सर आंखें बंद कर ली जाती हैं, फिर लापरवाहिया शुरू हो जाती है.
हादसे के बाद भी वही हालात
आज फिर धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम सुंदरेल से पिकअप वाहन से बच्चों को मजदूरी करने के लिए ले जाया जा रहा था. जयस की टीम मौके पर पहुंची और पिकअप को रुकवाया. पिकअप वाहन में लगभग 50 मजदूर शामिल थे जिसमे नाबालिक बच्चें भी शामिल थे जिन्हे छुड़वाया गया ड्राइवर भी नाबालिक हीं लग रहा था. जयस के सदस्य जीवन सिंह ठाकुर ने बताया की जानकारी लिखी थी कि पिकअप में बच्चों को ठूस ठूस कर ले जाया जा रहा था उन्हें छुड़वाया गया और गाड़ी थाने लाये.
