नई दिल्ली:– ट्रंप और मेरी राय एक जैसी नहीं
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों और इस डील पर मतभेदों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि ट्रंप और मैं साझेदार हैं और हम अक्सर कई मुद्दों पर एक-दूसरे से सहमत होते हैं, लेकिन कभी-कभी हमारी राय पूरी तरह एक जैसी नहीं होती।।
यह बयान उस समय आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान के मसले पर इजरायल का अपना नजरिया है जो अमेरिकी रुख से अलग हो सकता है।
पीछे नहीं हटेगा इजरायल
नेतन्याहू ने एक बार फिर दोहराया कि इजरायल की सर्वोच्च प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि समझौता हो या न हो, ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इजरायल ने खुद को विनाश से बचा लिया है, लेकिन उनकी जंग अभी खत्म नहीं हुई है। इजरायली पीएम के मुताबिक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को विफल करने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, इजरायल उन्हें उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
रणनीतिक क्षेत्रों और बफर जोन पर नियंत्रण
क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करते हुए नेतन्याहू ने बताया कि इजराइली सेना ने उन महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया है, जिनका उपयोग पहले हिजबुल्लाह इजरायल को खतरा पहुंचाने के लिए करता था। उन्होंने लेबनान को लेकर कहा कि जब तक आवश्यक होगा, इजरायली सेना बफर जोन में बनी रहेगी।
इजरायल का मानना है कि इन सुरक्षा क्षेत्रों में बने रहना उसकी सीमा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और वह हमलों को रोकने के लिए अपनी कार्रवाई की स्वतंत्रता को किसी भी कीमत पर बरकरार रखेगा।
जंग अभी खत्म नहीं हुई है
नेतन्याहू ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह स्पष्ट किया कि इजरायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियानों ने भले ही तत्काल परमाणु विनाश के खतरे को कम कर दिया हो, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य स्पष्ट है इजरायल पर मंडरा रहे परमाणु खतरे को जड़ से समाप्त करना। जिनेवा समझौते के सार्वजनिक होने के बावजूद, इजरायल का यह कड़ा रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और अधिक जटिल हो सकती है।
