नई दिल्ली;– हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली ऋषि पंचमी इस बार 15 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाए किसी देवी-देवता की पूजा न करके बल्कि सप्तऋषियों की पूजा करती है।
इसीलिए ऋषि पंचमी को भारतीय ऋषि परंपरा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जताने वाला पर्व माना जाता है। आइए जानते हैं ऋषि पंचमी पर पूजा कैसे की जाती है और महिलाओं के लिए यह व्रत क्यों खास माना जाता है।
साल 2026 ऋषि पंचमी कब है?
मंगलवार, 15 सितंबर 2026
हिंदू कैलेंडर माह भाद्रपद
तिथि शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि
पंचमी तिथि की आंरभ तिथि और समय 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर
पंचमी तिथि की समाप्ति तिथि और समय 16 सितंबर को सुबह 8 बजकर 59 बजे
महिलाओं के लिए यह व्रत क्यों खास माना जाता है?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस पंचमी का संबंध महिलाओं के पीरियड्स से है। पीरियड्स में धार्मिक कार्यों से जुड़े दोषों से मुक्ति के लिए महिलाएं विशेष रूप से इस व्रत को करती हैं। मान्यता है कि इस दिन पर गंगा स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और सप्तऋषियों का आशीर्वाद मिलता है।
ऋषि पंचमी व्रत को तपस्या और ध्यान के जरिए से आत्म-शुद्धि का दिन माना जाता था। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से अनजाने में हुई गलतियों और धार्मिक कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए माफी मिलती है।
ऋषि पंचमी का व्रत भक्तों को आत्मनिरीक्षण करने, आत्मसंयम का अभ्यास करने और ज्ञानियों के उपदेशों को याद रखने के लिए प्रेरित करता है। इस व्रत को करने से गुस्सा और नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
ऋषि पंचमी पर कैसे करें सप्तऋषियों की पूजा?
ऋषि पंचमी के दिन सुबह स्नान करके पहले घर और मंदिर की सफाई करें।
लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर हल्दी, कुमकुम या रोली से मंडल बनाएं।
इसके बाद सप्तऋषियों के प्रतीक के रूप में तस्वीर, 7 सुपारी या 7 कुश के गट्ठे रखे।
कुछ परंपराओं में देवी अरुंधती और अपने गुरु की तस्वीर भी साथ रखी जाती है।
सप्तऋषियों के प्रतीक पर पहले शुद्ध जल और फिर पंचामृत अर्पित करें।
इसके बाद चंदन, अक्षत, फूल, माला और धूप अर्पित करके घी का दीपक जलाएं।
मौसमी फल और पंचमेवा नैवेद्य में रखें। सप्तऋषि मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दिया जाता है।
