नई दिल्ली :– राजधानी दिल्ली में जहां एक ओर वैश्विक AI समिट के मंच से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बेहतर भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर यही तकनीक सियासी जंग का नया हथियार बनती दिख रही है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच AI जनरेटेड वीडियो को लेकर तीखा विवाद छिड़ गया है, जो अब लोकसभा की प्रिविलेज कमेटी तक पहुंच गया है।
मामले की शुरुआत कांग्रेस द्वारा जारी एक AI जनरेटेड वीडियो से हुई, जिसमें लोकसभा स्पीकर को एक व्यंग्यात्मक अंदाज में दिखाया गया। बीजेपी ने इसे सदन की अवमानना करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने इस पर प्रिविलेज कमेटी में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा, AICC के जयराम रमेश और सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनाटे को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने को कहा गया है।
सुप्रिया श्रीनाटे ने सफाई देते हुए कहा कि वीडियो में स्पष्ट रूप से “ड्रामाटाइज्ड वर्शन” लिखा गया था और यह लोकतांत्रिक स्थिति को व्यंग्यात्मक तरीके से दिखाने की कोशिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में उनके कई AI वीडियो पुलिस हस्तक्षेप के बाद हटाए गए, जबकि बीजेपी समर्थकों के वीडियो खुलेआम प्रसारित हो रहे हैं।
दूसरी ओर, बीजेपी समर्थक समूहों की तरफ से भी AI वीडियो वायरल किए गए, जिनमें राहुल गांधी को अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस से निर्देश लेते हुए दर्शाया गया। इसके जवाब में कांग्रेस ने एक और वीडियो साझा किया, जिसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष के नेता को बोलने से रोकने के संदर्भ में दिखाया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि AI तकनीक की सीमाएं क्या होंगी? राजनीतिक व्यंग्य और भ्रामक सूचना के बीच रेखा कहां खींची जाएगी? संसद की गरिमा और डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनेगा? फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि राजनीति में AI का प्रवेश नई तरह की बहस और टकराव को जन्म दे चुका है। आने वाले समय में यह तकनीक लोकतांत्रिक संवाद की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
