नई दिल्ली:– सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी माना जाता है, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने इस व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां आम लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर चालान काटे जा रहे हैं और करोड़ों रुपये की वसूली हो रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी वाहनों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने से दोहरे मापदंड की चर्चा तेज हो गई है।
रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई, भारी जुर्माना वसूला गया
मार्च महीने में ट्रैफिक पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। कुल 1 लाख 12 हजार 271 वाहन चालकों पर नियम तोड़ने के आरोप में चालान जारी किए गए। इनमें से 23 हजार 577 लोगों ने जुर्माने की राशि जमा भी कर दी। केवल एक महीने में ही 3 करोड़ 19 लाख रुपये की वसूली की गई।
अगर जनवरी से मार्च 2026 की बात करें, तो तीन महीनों में कुल 5 करोड़ 64 लाख 83 हजार 800 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार कार्रवाई पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सख्त रही है।
सरकारी वाहनों पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
इन सबके बीच सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी अवधि में सरकारी गाड़ियों के खिलाफ एक भी चालान दर्ज नहीं किया गया। जबकि सड़कों पर सरकारी वाहनों की भी बराबर मौजूदगी रहती है और उनसे भी नियमों के उल्लंघन की संभावना रहती है।
ट्रैफिक विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि सरकारी गाड़ियों को कार्रवाई से छूट दी गई है। हालांकि यह दावा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और इसे लेकर विवाद भी सामने आया है।
विभागों के बीच अलग-अलग दावे
इस मामले में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस जहां सरकारी वाहनों को छूट मिलने की बात कह रही है, वहीं परिवहन विभाग इसे गलत ठहरा रहा है।
अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। उनके अनुसार, कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि सरकारी वाहनों को नियमों के उल्लंघन पर छूट दी जा सकती है।
पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा कार्रवाई
इस साल कार्रवाई के आंकड़े पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। जनवरी से मार्च 2025 के बीच जहां 30 हजार 443 चालान जारी किए गए थे, वहीं इस साल इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 4 हजार 601 तक पहुंच गई। यानी करीब साढ़े छह गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जुर्माने की राशि में भी बड़ा अंतर देखा गया है। पिछले साल तीन महीनों में लगभग 2 करोड़ 96 लाख रुपये वसूले गए थे, जबकि इस साल यह रकम बढ़कर 5 करोड़ 64 लाख रुपये से अधिक हो गई।
लोगों में बढ़ रहा असंतोष
लगातार बढ़ती कार्रवाई और भारी जुर्माने के कारण आम लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। कई लोग इसे अन्यायपूर्ण मानते हैं और सवाल उठा रहे हैं कि यदि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होती है, तो यह सभी पर समान रूप से क्यों नहीं लागू होती।
