माल्टा में जो चट्टानें और शैवाल पहले समंदर की सतह के नीचे हुआ करते थे, वो साफ नजर आने लगे हैं. ऐसे में लोग हैरान हैं. सवाल ये है कि समंदर का पानी क्यों अचानक कम हो गया.दुनियाभर के देश एक ओर समंदर के बढ़ते जलस्तर से परेशान हैं और कई शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है… इस बीच माल्टा और गोजो के समुद्री तटों पर पानी के लेवल में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है.
टाइम्स ऑफ माल्टा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अब तक समंदर के जलस्तर में 50 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है. दुनियाभर के देश एक ओर समंदर के बढ़ते जलस्तर से परेशान हैं और कई शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है… इस बीच माल्टा और गोजो के समुद्री तटों पर पानी के लेवल में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है. टाइम्स ऑफ माल्टा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अब तक समंदर के जलस्तर में 50 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है.अक्टूबर 1992 और मार्च 1993 के बीच 40 सेमी का अंतर दर्ज किया गया था.
लेकिन इस बार तीन दशक पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. जलस्तर में कमी होने से समुद्रतट लंबा और बड़ा हो गया है. स्थानीय लोग और पर्यटक हैरान हैं. समंदर विशाल एरिया कवर करता है और ऐसे में जलस्तर में 50 सेमी की कमी भी बहुत होती है. तो सवाल ये है कि 50 सेमी पानी गया कहां. अक्टूबर 1992 और मार्च 1993 के बीच 40 सेमी का अंतर दर्ज किया गया था. लेकिन इस बार तीन दशक पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. जलस्तर में कमी होने से समुद्रतट लंबा और बड़ा हो गया है.
स्थानीय लोग और पर्यटक हैरान हैं. समंदर विशाल एरिया कवर करता है और ऐसे में जलस्तर में 50 सेमी की कमी भी बहुत होती है. तो सवाल ये है कि 50 सेमी पानी गया कहां.आम तौर पर समंदर का जलस्तर नवंबर में सबसे ज्यादा होता है और मार्च में सबसे कम. जबकि फरवरी में ही यह कमी देखी जा रही है. हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता और बदलाव की पूरी संभावना रहती है. माल्टा में जो चट्टानें और शैवाल पहले समंदर की सतह के नीचे हुआ करते थे, वो साफ नजर आने लगे हैं. ऐसे में लोग हैरान हैं. आम तौर पर समंदर का जलस्तर नवंबर में सबसे ज्यादा होता है और मार्च में सबसे कम. जबकि फरवरी में ही यह कमी देखी जा रही है. हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता और बदलाव की पूरी संभावना रहती है. माल्टा में जो चट्टानें और शैवाल पहले समंदर की सतह के नीचे हुआ करते थे, वो साफ नजर आने लगे हैं. ऐसे में लोग हैरान हैं.माल्टा कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड टेक्नोलॉजी में समुद्र विज्ञान के प्रोफेसर आल्डो ड्रैगो कहते हैं कि समंदर के जलस्तर में हर साल होने वाली औसत कमी 15 सेमी रहती है पर इस बार यह बहुत ज्यादा है.
वो जलस्तर में कमी को सुनामी थ्योरी और हाल में आए भूकंप का प्रभाव बता रहे हैं. माल्टा कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड टेक्नोलॉजी में समुद्र विज्ञान के प्रोफेसर आल्डो ड्रैगो कहते हैं कि समंदर के जलस्तर में हर साल होने वाली औसत कमी 15 सेमी रहती है पर इस बार यह बहुत ज्यादा है. वो जलस्तर में कमी को सुनामी थ्योरी और हाल में आए भूकंप का प्रभाव बता रहे हैं.एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलस्तर में कमी नैचुरल है और यह वार्षिक चक्र का हिस्सा है.
वाटर लेवल में गिरावट ऐतिहासिक जरूरी है, लेकिन यह प्राकृतिक प्रक्रिया है. उनका कहना है कि गर्मियों में जलस्तर वापस बढ़कर पुरानी जगह आ जाएगा. वो कहते हैं कि चिंता की कोई बात नहीं है, समुद्र का जलस्तर अपनी पहले वाली स्थिति में लौट आएगा.एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलस्तर में कमी नैचुरल है और यह वार्षिक चक्र का हिस्सा है. वाटर लेवल में गिरावट ऐतिहासिक जरूरी है, लेकिन यह प्राकृतिक प्रक्रिया है.
उनका कहना है कि गर्मियों में जलस्तर वापस बढ़कर पुरानी जगह आ जाएगा. वो कहते हैं कि चिंता की कोई बात नहीं है, समुद्र का जलस्तर अपनी पहले वाली स्थिति में लौट आएगा.