नई दिल्ली:– लाखों यूजर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आ गई है। जिसमें NEET परीक्षा पेपर लीक विवाद के चलते अस्थायी रूप से बैन किए गए Telegram को एक बार फिर बहाल कर दिया गया है। बता दें कि सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध 22 जून की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया था, जिसके बाद मंगलवार सुबह से Telegram दोबारा Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध हो गया है। लेकिन कई यूजर्स को ऐप एक्सेस करने में शुरुआत में दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। इसके अलावा खासकर Apple यूजर्स के लिए Telegram सुबह 11 बजे तक App Store पर दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन अब ऐप पूरी तरह से बहाल हो चुका है और सामान्य रूप से काम कर रहा है।
क्यों लगाया गया था Telegram पर बैन?
जैसा कि सभी को पता है कि सरकार ने Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध इसलिए लगाया था क्योंकि प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर NEET परीक्षा के फर्जी और लीक पेपर शेयर किए जा रहे थे। इसके अलावा भ्रामक जानकारी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। जानकारी के अनुसार 3 जून को सरकारी अधिकारियों ने Telegram के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। जिसमें इन मुद्दों को उठाया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने Telegram और उससे जुड़े वेब लिंक को 22 जून तक ब्लॉक करने का फैसला सुनाया था। इतना ही नहीं Telegram को 30 जून तक अपने मैसेज एडिटिंग फीचर को भी बंद रखने का निर्देश दिया गया है। जिसको लेकर सरकार का मानना था कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल कर संदेशों में बाद में बदलाव किए जा सकते हैं।
अगर Telegram नहीं चल रहा तो क्या करें?
अगर आपका Telegram भी बैन हटने के बाद काम नहीं कर रहा है तो ऐसे में Android और iPhone यूजर्स कुछ आसान स्टेप्स अपनाकर ऐप को दोबारा शुरु कर सकते है।
Android यूजर्स के लिए
Settings में जाएं
Apps सेक्शन खोलें
Telegram सर्च करें
Force Stop पर टैप करें
ऐप दोबारा खोलें और कनेक्ट होने का इंतजार करें
iPhone यूजर्स के लिए
App Store में जाकर Telegram का लेटेस्ट अपडेट इंस्टॉल करें
ऐप को पूरी तरह बंद करें
दोबारा लॉन्च करें और कुछ सेकंड इंतजार करें
बैन पर क्या बोले Telegram के CEO?
Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने इस फैसले की आलोचना की थी। उनका कहना था कि कुछ यूजर्स की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के प्रतिस्पर्धियों ने सरकार पर दबाव बनाया हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
