नई दिल्ली:– दुनियाभर में शिकारी पक्षियों और गिद्धों की घटती संख्या को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। एक हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पिछले 16 वर्षों में कई महत्वपूर्ण शिकारी पक्षियों की आबादी में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ये पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र (Eco System) को संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। गिद्ध और अन्य शिकारी पक्षी मृत जीवों को खाकर पर्यावरण को साफ रखने में मदद करते हैं, लेकिन अब इनकी संख्या तेजी से कम हो रही है।
अध्ययन में बताया गया कि शिकारी पक्षियों को रहने के लिए बड़े क्षेत्रों की जरूरत होती है और उनका प्रजनन भी धीमी गति से होता है। इसी वजह से वे कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल, बिजली के तारों से करंट लगने, पवन चक्कियों से टकराने और अवैध शिकार जैसे खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार इन पक्षियों की आबादी में गिरावट का पता तब चलता है, जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। इसलिए उनकी नियमित निगरानी को ‘प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ माना जा रहा है।
यह अध्ययन दक्षिण अफ्रीका के मध्य क्षेत्र में 2009 से 2025 के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। इस दौरान शोधकर्ताओं ने लगभग चार लाख किलोमीटर की यात्रा कर शिकारी और बड़े पक्षियों की गिनती की। अध्ययन में 18 शिकारी पक्षियों और 8 अन्य बड़े पक्षियों की प्रजातियों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि 26 में से 13 प्रजातियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई, जबकि केवल 3 प्रजातियों में बढ़ोतरी देखी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक ‘लेसर केस्ट्रेल’, ‘अमूर फाल्कन’ और ‘स्टेपी बजर्ड’ जैसी प्रवासी प्रजातियों की आबादी आधे से भी कम हो गई है। वहीं ‘जैकल बजर्ड’, ‘वेरॉक्स ईगल’ और ‘सेक्रेटरीबर्ड’ जैसे स्थानीय शिकारी पक्षियों की संख्या में भी 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट पाई गई। हालांकि कुछ प्रजातियों जैसे ‘व्हाइट-नेक्ड रैवेन’, ‘ग्रेटर केस्ट्रेल’ और ‘व्हाइट-बैक्ड वल्चर’ की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में कई शिकारी पक्षियों की प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकती हैं। वैज्ञानिकों ने अफ्रीका समेत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में प्रभावी निगरानी और संरक्षण कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया है।
