मध्य प्रदेश:- सीधी जिले में सरकारी स्कूलों की हालत के लिए जिम्मेदार अधिकारी भले ही बेहतर सुविधाएं देने का दावा करें, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है. हर्दी (सिहावल विकासखंड) के शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल के शिक्षक जर्जर इमारत, छात्रों की कम संख्या और कनेक्टिविटी की समस्याओं से जूझ रहे हैं. वहीं स्कूल के पास ही बंद पड़े एक स्टोन क्रशर यूनिट के परिसर में बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे छोटे बच्चों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं. हालंकि स्कूल प्रबंधन ने साफ-सफाई की कमी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के बारे में शिकायतें की हैं, लेकिन अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं.
सीधी के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर
दरअसल, हर्दी में मौजूद शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की तस्वीरें सरकारी स्कूलों की हालत पर सवाल खड़े करती हैं. भले ही यहां 50 से भी कम छात्र पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल की इमारत कई जगहों से जर्जर हो चुकी है. छत और दीवारों से लोहे की सरिया बाहर निकली हुई हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है. इसके अलावा डिजिटलाइजेशन के इस दौर में भी यहां के शिक्षकों को नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या से जूझना पड़ता है. ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए सिग्नल की तलाश में उन्हें अक्सर स्कूल परिसर में इधर-उधर घूमना पड़ता है. भवन के कई हिस्से जर्जर हैं. ऐसे में स्कूल आने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
स्कूल के पास पानी से भरे गड्ढे
स्कूल के पास बंद पड़े क्रशर परिसर में क्रशर चलाने के दौरान खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढे अब बारिश के पानी से लबालब भर गए हैं. ये गहरे गड्ढे किसी मौत के कुएं से कम नहीं लग रहे हैं. इसके बावजूद छोटे-छोटे मासूम बच्चे रोज स्कूल आ रहे हैं, जिससे किसी अनहोनी घटना की आशंका बनी हुई है. साथ ही बारिश के मौसम में स्कूल परिसर में झाड़ियां उगने और साफ-सफाई न होने से भी चिंता बढ़ रही है. स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि असामाजिक तत्व स्कूल परिसर का इस्तेमाल नशा करने के लिए भी करते हैं. इस बारे में प्रिंसिपल ने लिखित शिकायत भी की थी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति का आरोप है.
व्यवस्था पर उठे सवाल
मीडिया के पहुंचने के बाद स्कूल की जो तस्वीर सामने आई, वह सरकारी स्कूलों की बेहतर स्थिति के दावों पर सवाल खड़े करती है. अब यह देखना बाकी है कि जिम्मेदार विभाग इस खराब स्थिति को सुधारने में कितना समय लेता है और मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.
