नई दिल्ली:– प्राचीन समय से ही मंदिर में प्रवेश करते ही घंटी बजाने की परंपरा है। अक्सर लोग इसे सिर्फ एक विधि समझकर निभाते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। जैसे किसी घर में प्रवेश करते समय हम ठक-ठक या घंटी बजाकर अपने आने की सूचना देते हैं, वैसे ही भगवान के समक्ष भी हम अपनी हाजिरी लगाते हैं। माना जाता है कि घंटी की ध्वनि भक्त का ध्यान पूजा की ओर केंद्रित करने और ईश्वर का स्मरण करने का भाव जगाती है। आइए जानते हैं मंदिर में घंटी बजाने की 4 प्रमुख वजहें।
- पूजा से पहले भगवान का स्मरण
मंदिर की घंटी बजाने को भगवान का ध्यान करने की शुरुआत से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि घंटी की आवाज भक्त को कुछ क्षणों के लिए बाहरी विचारों से हटाकर पूजा और ईश्वर के प्रति एकाग्र होने में मदद करती है। - मंदिर में प्रवेश का संकेत
घंटी बजाना मंदिर में प्रवेश और भगवान के दर्शन से पहले अपनी उपस्थिति का प्रतीक भी माना जाता है। भक्त घंटी बजाकर ईश्वर का स्मरण करता है और इसके बाद पूजा की ओर बढ़ता है। भगवान के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का यह एक तरीका कहा जा सकता है। - मन को एकाग्र करने का भाव
घंटी की गूंजती ध्वनि, मंदिर की धूप, धूप की खुशबू व फूलों की महक ये सारी चीजें व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। ये सारी चीजें व्यक्ति को मंदिर में एकाग्रता में मदद करती है और सारी सांसारिक चीजों को भूलकर मन आध्यात्म में रम जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने से जोड़ा जाता है। इसलिए मंदिरों में प्रवेश द्वार या गर्भगृह के पास घंटियां लगाई जाती हैं।
घंटी की आवाज वातावरण में सकारात्मकता का भाव पैदा करती है और भक्त को नकारात्मक विचारों से हटाकर भगवान के प्रति ध्यान लगाने में मदद करती है। मंदिर की घंटी की ध्वनि को ध्यान से सुने, तो वो शुरु टनकार के साथ होती है और शून्य तक बजती रहती है। ये हमारे भीतर चल रहे द्धंद्ध को भी समाप्त करती है और मन शांत होता है।
