नई दिल्ली:– भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में हुई उच्चस्तरीय रक्षा मंत्रियों की बैठक में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनाई।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मॉल्स ने की। दोनों नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी क्वाड की सीमाओं से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक सहयोग का रूप ले रही है। बैठक में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष फोकस रहा। दोनों देशों ने समुद्री निगरानी बढ़ाने, संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप तैयार करने और नौसेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई।
समुद्री गश्ती विमानों के जरिए निगरानी बढ़ाने और समुद्र के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नई तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सीमा सुरक्षा एजेंसी के बीच सहयोग को और मजबूत करने का फैसला लिया गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया जून 2026 में चेन्नई में संयुक्त खोज एवं बचाव अभ्यास आयोजित करेंगे, जिससे समुद्र में आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी। दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों और अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय तथा एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों के उपयोग को जारी रखने पर भी सहमति जताई। रक्षा उद्योग के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है।
दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों और सेवाओं के क्षेत्र में नए समझौते की दिशा में काम शुरू करने का निर्णय लिया है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले वर्ष भारत में अपना पहला रक्षा व्यापार मिशन भेजा था और अब संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से रक्षा उत्पादन में साझेदारी के नए अवसर तलाशे जाएंगे। बैठक में भविष्य की सैन्य तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान को लेकर भी चर्चा हुई। सेंसर तकनीक और उभरती रक्षा प्रणालियों पर दोनों देश मिलकर रिसर्च करेंगे। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 2026 में होने वाले रक्षा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया है।
हाल के वर्षों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग पर भी संतोष जताया गया। ऑस्ट्रेलिया ने भारत के ‘मिलन’ नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लिया, जबकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया के ‘काकाडू’ सैन्य अभ्यास में भागीदारी की। अब भारत 2027 में होने वाले ऑस्ट्रेलिया के बड़े सैन्य अभ्यास ‘टैलिसमैन सेबर’ में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा। बैठक में क्वाड समूह की भूमिका पर भी चर्चा हुई और दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को खुला, सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
