नई दिल्ली:– लोगों, खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे एनर्जी ड्रिंक्स के क्रेज पर अब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। FSSAI ने रेड बुल, पेप्सिको इंडिया और कैम्पा जैसे कई बड़े ब्रांडों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके उत्पादों पर “Energy Drink” शब्द का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को गुमराह तो नहीं कर रहा। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये ड्रिंक्स वास्तव में शरीर को ऊर्जा देती हैं या सिर्फ कुछ समय के लिए उत्तेजना पैदा करती हैं।
FSSAI के पूर्व निदेशक प्रदीप चक्रवर्ती ने भी लोगों को एनर्जी ड्रिंक्स से दूरी बनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि FSSAI ने विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर कैफीन की अधिकतम सीमा 300 मिलीग्राम प्रति लीटर तय की थी। साथ ही चेतावनी दी गई कि एक दिन में 500 मिलीलीटर से अधिक कैफीन युक्त ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए ऐसे पेय विशेष रूप से जोखिम भरे हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन और चीनी (शुगर) की मात्रा काफी अधिक होती है। PubMed में प्रकाशित शोधों के मुताबिक इनका अधिक सेवन हाई ब्लड प्रेशर, तेज धड़कन (साइनस टैकीकार्डिया), बेचैनी और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि लगातार एनर्जी ड्रिंक्स पीने से अनिद्रा, दांतों की खराबी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, पेट की गड़बड़ी, डिहाइड्रेशन और किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। गंभीर मामलों में एक्यूट किडनी इंजरी, दौरे, वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन, स्ट्रोक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं। कुछ मामलों में इनसे जुड़ी मौतों की भी रिपोर्ट सामने आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद शुगर और कैफीन दिमाग में डोपामाइन का स्तर बढ़ाते हैं, जिससे इनकी लत लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए इन्हें वास्तविक ऊर्जा का स्रोत नहीं माना जा सकता। ये केवल थोड़े समय के लिए सतर्कता या उत्तेजना का एहसास कराती हैं, लेकिन बाद में शरीर पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऊर्जा के लिए एनर्जी ड्रिंक्स पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी का सेवन बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं।
