नई दिल्ली:– हिंदू धर्मशास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार और जगत् का पालनकर्ता माना गया है। द्वापर युग में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा में अवतार लेकर उन्होंने अपनी बाल-लीलाओं, धर्म-स्थापना और श्रीमद्भागवत गीता के उपदेशों से संसार को सत्य, प्रेम और निष्काम कर्म का मार्ग दिखाया।
श्रीकृष्ण का स्वरूप इतना विराट और बहुआयामी है कि उन्हें 108 विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। प्रत्येक नाम केवल एक संबोधन नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक दिव्य पौराणिक कथा, विशेष गुण और गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा हुआ है।
जन्माष्टमी पर 108 नामों के स्मरण का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों का जाप करने या उनका स्मरण करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। कान्हा के प्रत्येक नाम का ध्यान करने से व्यक्ति के भीतर भक्ति और आत्मबल का संचार होता है।
