मध्यप्रदेश:– पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लाइनमैन और फील्ड पर सुधार व मेंटेनेंस करने वाले कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। कंपनी में पुराने दौर के लाइनमैन लगातार रिटायर हो रहे हैं। बिजली कंपनी में शहर के ज्यादातर जोन में लाइन सुधार और मेंटेनेंस का काम सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।
जोन से मांग उठी थी कि बिजली कंपनी लाइनमैन के पदों पर स्थाई भर्ती करें। बीते सप्ताह कंपनी की बोर्ड बैठक हुई तो कंपनी ने लाइन स्टाफ की भर्ती पर तो ध्यान नहीं दिया, इसके उलट रिटायर अधिकारियों को वापस कंपनी में रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब बिजली कंपनी के इंजीनियर ही इस मनाने फैसले पर भड़क गए हैं। विद्युत मंडल अभियंता संघ ने तो मनमानी के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया है।
62 वर्ष की आयु पूर्ण कर रिटायर हो रहे अधिकारियों को संविदा नियुक्ति
मप्र विद्युत मंडल अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री और बिजली कंपनी के एमडी को ज्ञापन सौंपकर रिटायर अधिकारियों को फिर से कंपनी में अफसर बनाकर फिर से पद पर रखने के निर्णय का विरोध किया है। अभियंता संघ ने इसे नियमविरुद्ध बताने के साथ ही युवा इंजीनियरों और कर्मचारियों के अधिकारों को छीनने वाला कदम बताया।
दरअसल, बिजली कंपनी ने चीफ इंजीनियर और निदेशक जैसे बड़े पदों पर रिटायर्ड हुए अधिकारियों को फिर तैनाती देने का प्रस्ताव पास कर दिया है। 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर रिटायर हो रहे अधिकारियों को फिर से संविदा नियुक्ति दी जा रही है। अभियंता संघ ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी दशकों तक सेवा देने के बाद अब जब सेवा पूरी कर चुके हैं तो युवा इंजीनियरों को पदोन्नत कर उन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इसके उलट कंपनी मोटे वेतन वाले पदों पर काम कर रिटायर हुए अधिकारियों को फिर से उस वेतन पर रखने का रास्ता तैयार कर रही है। अभियंता संघ के महासचिव ने लिखित आपत्ति लेते हुए कहा है कि यह युवा इंजीनियरों के अधिकारों और अवसरों को छिनने वाला कदम है। इसे वापस लिया जाना चाहिए।
गड़बड़ी व जांच अयोग्यता नहीं
कंपनी ने सप्ताहभर पहले ही नियम को मंजूरी दी। इस बीच चीफ इंजीनियर जैसे पदों पर पुराने अधिकारियों को रखने की तैयारी भी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि छह माह पहले तक रिटायर हो चुके और आने वाले महीनों में रिटायर हो रहे चीफ इंजीनियर स्तरों से आवेदन भी मंगवा लिए गए हैं। फिर से नियुक्ति देने के लिए नाम भी तय कर लिए गए हैं।
इसमें तमाम ऐसे उम्मीदवारों ने भी आवेदन कर दिए हैं जो बिजली कंपनी में बीते वर्षों में नियमविरुद्ध नियुक्ति व अन्य अनियमितताओं की जांच में दोषी साबित हो चुके हैं। कंपनी संविदा नियुक्ति देने में इसे अयोग्यता नहीं मान रही। हालांकि कंपनी इसे बोर्ड का निर्णय बता रही है। एमडी अनूपकुमार सिंह चर्चा करने के लिए उपलब्ध नहीं हुए।
