आज विश्व जल दिवस यानी वर्ल्ड वॉटर डे (World Water Day) है. इस अवसर पर मुझे रहिमदास का एक दोहा याद आता है. वो कह गए हैं…’रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून…’ रहिमदास आज की मौजूदा स्थिति को काफी पहले समझ गए थे कि आने वाले समय में पानी कितना जरूरी है? उनके इस दोहे का सीधा सा अर्थ यही है कि पानी के बिना सब सुना है…इसके बिना लोगों की जिंदगी निरर्थक हो जाती है. एक और चीज हमेशा से सुनते आए होंगे कि ‘जल ही जीवन’ है.
इसकी चपेट में भारत समेत दुनिया के कई देश हैं. अगर भारत की बात करें तो हाल ही में बेंगलुरु में किस तरह पानी के लिए हाहाकार मचा था. 3000 से ज्यादा बोरवेल सूख गए. हजारों लोग पानी के लिए तरसने लगे. स्थिति बिल्कुल खराब हो गई थी. लोगों तक पानी पहुंचना बंद हो गया था. टैंकर वाले ज्यादा रकम वसूल लगे थे. बेंगलुरु में बढ़ते जल संकट के बीच 500 में बिकने वाले टैंकर कीमत 2000 रुपये हो गई थी. विकास के बढ़ते कदम के बीच पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है.भारत में जल संसाधन केवल 4 फीसदीऐसे में वर्ल्ड वॉटर डे (22 मार्च) पर हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि भारत में बेंगलुरु के अलावा पांच और ऐसे शहर हैं, जो आने वाले समय में ‘बेंगलुरु’ जैसे हालातों का सामना कर सकते हैं. मतलब इन शहरों में भी पानी के लिए हाहाकार मच सकता है.
इन पांच शहरों में दिल्ली, राजस्थान का जयपुर, पंजाब का बठिंडा, मुंबई और चेन्नई शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट एक राष्ट्रव्यापी मुद्दा है. भारत में दुनिया की आबादी का 18 प्रतिशत है लेकिन जल संसाधन केवल 4 फीसदी है.40 फीसदी भारतीयों को नहीं मिलेगा पानीविशेषज्ञों ने कहा कि भारत का जो मुख्य जल भंडार है, वह पांच साल में अपने सबसे निचले मार्च स्तर पर है. नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक 40 फीसदी भारतीयों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होगा. लगभग 600 मिलियन भारतीय पहले से ही गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं.
दिल्ली: दिल्ली की आबादी 2.4 करोड़ है. यहां 600 मिमी प्रति मिनट वर्षा होती है, जो जरूरत से काफी कम है.
दिल्ली 50 फीसदी पानी की जरूरतों के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब पर निर्भर है. अगर इन राज्यों ने इनकार कर दिया तो दिल्ली बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगी
.मुंबई: मुंबई समुद्र के किनारे बसा है. यहां भारी मात्रा में बारिश होती है. मुंबई अच्छे जल संसाधनों से समृद्ध है लेकिन तेजी से हो रहे शहरीकरण और जनसंख्या विस्फोट के सामने जल संसाधन प्रबंधन प्रभावी नहीं है इसलिए आने वाले समय में यहां भी पानी की किल्लत हो सकती है.
जयपुर: जयपुर पानी की जरूरतों के लिए बाणगंगा नदी पर बने रामगढ़ बांध पर निर्भर है. इसका भूजल स्तर नीचे जा रहा है. शहर को अपने सीमित संसाधनों के भीतर रहना होगा नहीं तो यहां भी पानी के हाहाकार मच सकता है.
बठिंडा: भले ही पंजाब में पांच नदियां हैं, लेकिन इसकी कृषि जल खपत वॉटर रिचार्स की तुलना में बहुत अधिक है. नीति आयोग की रिपोर्ट में पंजाब के कई शहरों पर जल संकट का खतरा बताया गया है.
चेन्नई: तटीय शहर चेन्नई में 1400 मिमी की भारी वर्षा होती है, जो दिल्ली में होने वाली वर्षा से दोगुनी से भी अधिक है और इसकी जनसंख्या बहुत कम है. फिर भी यह जल निकायों और भूजल स्तर के कंक्रीटीकरण और कुप्रबंधन के कारण इसे पानी की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.संसाधन के कुप्रबंधन को ठीक करना जरूरीपानी की कमी एक मानव निर्मित आपदा है, इसलिए संसाधन के कुप्रबंधन को ठीक करना जरूरी है. दीवान सिंह ने कहा कि हम एक टिक-टिक बम पर बैठे हैं. जहां जितनी खपत है, वहां उससे ज्यादा खपत हो रही है. उदाहरण के लिए, दिल्ली पड़ोसी राज्यों से पानी ले रही है, जहां पहले से ही पानी की कमी है. सिंह ने आगे कहा कि 1977 से दिल्ली जल बोर्ड निर्माण की लगातार अनुमति देता रहा है, भले ही शहर में अधिक पानी न हो. बता दें कि बेंगलुरु में 14 हजार से अधिक बोरवेल हैं जिनमें से 6900 सूख चुके हैं. कइयों पर अतिक्रमण हो गया तो कई बारिश के बिना सूख गए हैं. बेंगलुरु को 2,600 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, जिसमें से 1470 एमएलडी कावेरी नदी से और 650 एमएलडी बोरवेल से आता है.
