नई दिल्ली:– भारतीय महिलाओं में बढ़ता तनाव, एंग्जायटी और थकान स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इन समस्याओं के कई कारण हैं, लेकिन कुछ ऐसी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जड़ी-बूटियाँ हैं जो शरीर और मन पर पड़ने वाले इनके बुरे असर को कम करने में मदद कर सकती हैं। ऐसी ही दो असरदार जड़ी-बूटियाँ हैं- अश्वगंधा और शतावरी।
ये दोनों ही जड़ी-बूटियां तनाव के स्तर को कम करने और हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती हैं। सही मात्रा में अश्वगंधा लेने से तनाव और एंग्जायटी कम हो सकती है। वहीं, ‘फ्रंटियर्स ऑफ़ रिप्रोडक्टिव हेल्थ’ में प्रकाशित रिसर्च इस बात की पुष्टि करती है कि शतावरी की जड़ मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन को संतुलित करने में फायदेमंद होती है।
तनाव, थकान और एंग्जायटी का स्वास्थ्य पर असर
जब स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ प्राकृतिक हार्मोन पर असर डालता है, तो हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका असर मासिक धर्म चक्र, एनर्जी लेवल और दिन भर के मूड पर दिख सकता है। तनाव और हार्मोन आपस में जुड़े होते हैं और इनके कारण बाल झड़ना, थकान और एंग्जायटी जैसे लक्षण हो सकते हैं। आज की फास्ट लाइफ स्टाइल में अत्यधिक मानसिक थकान भी हार्मोन असंतुलन का कारण हैं।
क्या है शतावरी
शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे महिलाओं के लिए जड़ी-बूटियों की रानी कहा जाता है। शतावरी पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण का काम करती है। यह एस्ट्रोजन के संतुलन पर काम करती है, जिससे रिप्रोडक्टिव सिस्टम को मदद मिलती है और नर्वस सिस्टम बेहतर ढंग से काम करता है। यह फर्टिलिटी को बढ़ावा देना, पीरियड्स के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करना और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाने का काम करती है। इसकी तासीर ठंडी होती है।
क्या है अश्वगंधा
‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज’ में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, सीमित मात्रा में लेने पर अश्वगंधा स्ट्रेस लेवल को कम करता है। यह स्ट्रेस कम करने, कोर्टिसोल लेवल घटाने और एक एडाप्टोजेन के तौर पर बड़े पैमाने पर काम करने के लिए जाना जाता है। इसकी तासीर गरम होती है।
क्या है इन जड़ी बुटियों के साइड इफेक्ट्स
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सेवन सही तरीके से करना चाहिए। आपको बहुत ज्यादा डोज लेने से बचना चाहिए और अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
शतावरी मुख्य रूप से महिलाओं के हार्मोन बैलेंस के लिए है, जबकि अश्वगंधा तनाव कम करने में असरदार है। शतावरी एक नैचुरल एडाप्टोजेन और हार्मोन रेगुलेटर के तौर पर काम करती है और तनाव, थकान और हार्मोनल असंतुलन का सामना कर रही महिलाओं के लिए बहुत अच्छी है।
आयुर्वेद में शतावरी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से महिलाओं के लिए एक टॉनिक के तौर पर किया जाता रहा है। इसमें ऐसे प्लांट-बेस्ड कंपाउंड होते हैं, जो एस्ट्रोजन की तरह काम कर सकते हैं और हार्मोनल इंबैलेंस को स्थिर करने में मदद करते हैं। हालांकि, इसे डॉक्टर की देखरेख में ही लेना चाहिए, खासकर उन महिलाओं को जिन्हें हार्मोन संबंधी समस्याएं है।
