नई दिल्ली:– मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में लगातार हो रही देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई है। पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा कि इस परियोजना को लेकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि हाईवे का काम निर्धारित समय के अनुसार 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन लंबे समय बाद भी परियोजना पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। गडकरी ने यह टिप्पणी छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के दौरान की। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद वह इसके उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने खराब प्रदर्शन करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही।
15 साल से चल रहा है हाईवे का काम
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण की प्रक्रिया वर्ष 2011 में शुरू हुई थी। करीब 440 किलोमीटर लंबे हिस्से में निर्माण कार्य के बावजूद कई जगह सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ हिस्सों में गड्ढे, जलभराव, मरम्मत कार्य और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं सामने आने की बात कही गई है। परियोजना में देरी के पीछे जमीन अधिग्रहण, निर्माण से पहले की मंजूरियों और ठेकेदारों से जुड़ी परेशानियों को प्रमुख कारण बताया गया है।
खराब गुणवत्ता वाले काम पर ठेकेदारों पर कार्रवाई
गडकरी ने अपने संबोधन में ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, जिनके काम में लापरवाही या खराब गुणवत्ता सामने आती है। इससे पहले 22 जुलाई को राज्यसभा में सरकार की ओर से बताया गया था कि पिछले तीन वर्षों के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में खराब गुणवत्ता के काम को लेकर 103 ठेकेदारों और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा उन पर जुर्माना भी लगाया गया।
टोल शुरू, लेकिन कई हिस्सों में काम जारी
मुंबई-गोवा हाईवे के खारपाड़ा टोल प्लाजा पर मई में टोल वसूली शुरू की गई थी। हालांकि, इसके बाद भी परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण और सुधार से जुड़े काम जारी रहने की जानकारी सामने आई है। हाईवे पर वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2021 में बंदरों के लिए बनाया गया ओवरपास बाद में ढह गया था, जिसके बाद इसकी सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।
जमीन अधिग्रहण और ठेकेदारों की परेशानी बनी वजह
मुंबई-गोवा हाईवे को पहले 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जमीन अधिग्रहण, जरूरी मंजूरियों और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों के चलते परियोजना में लगातार देरी हुई। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में संसद में भी परियोजना में देरी के पीछे जमीन अधिग्रहण और ठेकेदारों से जुड़ी आर्थिक समस्याओं को कारण बताया था। मुंबई-गोवा हाईवे महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र से होते हुए गोवा को मुंबई से जोड़ता है। पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भी इस मार्ग को महत्वपूर्ण माना जाता है।
