नई दिल्ली:- हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को ब्रेन स्ट्रोक के प्रति जागरूक करना और इसके लक्षणों, बचाव तथा समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी देना है। स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें समय पर इलाज नहीं मिलने पर व्यक्ति की जान जा सकती है या उसे लंबे समय तक शारीरिक दिव्यांगता का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक?
ब्रेन स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। स्ट्रोक के मामलों में शुरुआती समय में उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
ब्रेन स्ट्रोक के कुछ प्रमुख लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इनमें चेहरे का एक तरफ झुक जाना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी, अचानक देखने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना और तेज सिरदर्द शामिल हैं।
यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए। लक्षण कुछ समय बाद ठीक हो जाएं, तब भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
स्ट्रोक आने पर क्या करें?
स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार या लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। तुरंत एंबुलेंस बुलाएं और मरीज को नजदीकी ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो। मरीज को अपनी ओर से दवा, खाना या पानी न दें, खासकर जब उसे निगलने में परेशानी हो रही हो।
इन उपायों से कम किया जा सकता है खतरा
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तंबाकू से दूरी और ब्लड प्रेशर व शुगर को नियंत्रित रखना इसके खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। विश्व स्ट्रोक दिवस का संदेश है कि जागरूकता, लक्षणों की समय पर पहचान और तत्काल चिकित्सा सहायता से स्ट्रोक के गंभीर परिणामों को कम किया जा सकता है। इसलिए स्ट्रोक के संकेतों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
