टीनएज यानी किशोरावास्था, यह उम्र ही ऐसी है कि बच्चे अपने परिवार से ज्यादा दोस्तों के साथ रहना पसंद करते हैं। मां-बाप को भी इस उम्र के बच्चों के साथ डील करना थोड़ा मुश्किल लगता है। जब बच्चे किशोरावास्था में आते हैं, तो उनके विचार, भावनाएं और इच्छाएं विकसित एवं दृढ़ होती हैं और इन्हें लेकर अक्सर उनका अपने पैरेंट्स से टकराव होता है।
यदि मां-बाप इस स्टेज पर अपने बच्चे को सही तरीके से हैंडल न करें, तो इससे पैरेंट्स और बच्चे का रिश्ता खराब हो सकता है और दोनों के बीच दूरियां आ सकती हैं। टीनएज उम्र में इस तरह का टकराव होना आम बात है। आप अपने और अपने बच्चे के साथ थोड़ा नरमी से पेश आएं और यहां बताएं गए तरीकों से बहस को आपसी समझ में विकसित करने की कोशिश करें। इन तरीकों से न सिर्फ आप दोनों की परेशानियों का समाधान निकलेगा बल्कि आप दोनों का रिश्ता भी मजबूत होगा।
उनका नजरिया समझेंउनका नजरिया समझेंजब बच्चा अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त कर रहा हो, तो आप उसे टोकें नहीं बल्कि उसकी बात को ध्यान से सुनें। भले ही आप उससे सहमत न हों, लेकिन फिर भी उसकी बात ध्यान से सुनें। आप उसे बताएं कि आप उसकी बात समझ रहें हैं। इससे बच्चा आपसे खुलकर बात कर पाएगा। उसकी बातों में दिलचस्पी और सहानुभूति दिखाकर आप उसे ये एहसास करवा सकते हैं कि आप उसकी बात सुन और समझ रहे हैं।
तमीज से करना है मनातमीज से करना है मनाआपको बच्चे के सामने बहस को ठीक तरह से मैनेज करने के लिए स्पष्ट बाउंड्री और गाइडलाइन बनाने हैं। उसे बताएं कि बिना चिल्लाए या बदतमीजी किए भी अपनी बात रखी जा सकती है।
