नई दिल्ली:– हिंदू धर्म में हवन को पूजा-पाठ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। किसी विशेष पूजा, यज्ञ, गृह प्रवेश या धार्मिक अनुष्ठान में हवन किया जाता है। इसमें अग्नि को हवन सामग्री, घी और दूसरी पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। आहुति देते समय विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ बोलने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवन की विधि से जुड़े कई छोटे-छोटे नियम भी बताए गए हैं। इन्हीं में से एक नियम है- आहुति देते समय उंगलियों के इस्तेमाल का।
हवन सामग्री
घर में हवन करने से पहले व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद हवन से जुड़ी सारी सामग्री पूजा स्थान पर एकत्रित कर लेनी चाहिए। हवन करने के लिए मिट्टी से बना हवन कुंड, जड़ी-बूटी, अक्षत, लकड़ी, तिल, गुड़, शुद्ध घी, समिधा, जौ, काला या सफेद तिल, सूखा नारियल, मिश्री या बताशा, शहद, कपूर, माचिस, आम की लकड़ी, शुद्ध जल, पुष्प, दीया, बाती, आदि को एक स्थान पर रखे लें।
आहुति देते समय किस उंगली का इस्तेमाल करें?
हवन कुंड में आहुति देते समय तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर का इस्तेमाल करने से बचने को कहा गया है। आहुति देने के लिए अंगूठे के साथ मध्यमा और अनामिका उंगली के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। यही आहुति देने की पारंपरिक मुद्रा है।
स्वाहा बोलकर दें आहुति
हवन में मंत्रों का विशेष महत्व होता है। सामान्य रूप से मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ बोलकर आहुति अग्नि को समर्पित की जाती है। भगवान श्री गणेश जी, नवग्रह, पंचदेवता, कुल देवता, स्थान देवता, ग्राम देवता, पितृ देवता को आहुति देने के बाद अपने आराध्य देवी या देवता अथवा गायत्री मंत्र का जप करते हुए अग्नि में आहुति दी जाती है।
दाहिने हाथ से आहुति देने की मान्यता
पूजा-पाठ में दाहिने हाथ को शुभ और धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की परंपरा रही है। इसी कारण सामान्य हवन विधि में आहुति भी दाहिने हाथ से ही दी जानी चाहिए। अनामिका उंगली के नीचे का हिस्सा सूर्य पर्वत कहलाता है, जिसे सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से हवन में इस उंगली से आहुति दी जाती है।
