नई दिल्ली:– आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित पीरियड्स, दर्द, ब्लीडिंग और हार्मोनल इंबैलेंस जैसे हेल्थ प्रॉब्लम तेजी से बढ़ रहे हैं। अकेले भारत में 44 मिलियन महिलाएं इससे पीड़ित हैं। आयुर्वेद इन समस्याओं को केवल एक बीमारी नहीं मानता, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जोड़कर देखता है।
आयुर्वेद के अनुसार, मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य का संकेतक होता है और पीरियड्स किसी महिला की सेहत संबंधी जानकारी को बताता है। पीरियड्स की गुणवत्ता शरीर के पोषण, पाचन और दोष (वात, पित्त और कफ) के संतुलन पर निर्भर करती है।
आयुर्वेद में मासिक धर्म का क्या महत्व है?
आयुर्वेद में बताया गया है कि मासिक धर्म में बहने वाला खून शरीर की पहली धातु रस धातु का बाय-प्रोडक्ट होता है। मॉडर्न साइंस में इसे लिंफ कहा जाता है और यह शरीर को पोषण देता है।
जब भोजन अच्छी तरह पचता है, तो उससे बनने वाला फ्लुइड पूरे शरीर में पहुंचकर सभी अंगों और ऊतकों को पोषण और नमी प्रदान करता है। कुछ समय बाद यही रस धातु रक्त धातु में बदल जाते हैं। जिससे पीरियड्स और ब्रेस्ट फीडिंग संचालित होते हैं।
सामान्य मासिक धर्म
मासिक चक्र सामान्यतः 25 से 30 दिनों का होता है।
ब्लीडिंग 3 से 7 दिनों तक रहती है।
अत्यधिक दर्द नहीं होता।
रक्त का प्रवाह सामान्य रहता है।
मासिक धर्म के दौरान शरीर में अत्यधिक कमजोरी या असहजता महसूस नहीं होती।
आयुर्वेद में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक आराम करने और शरीर को पर्याप्त विश्राम देने की सलाह दी जाती है।
शरीर में वात दोष बढ़ने पर
तेज दर्द और ऐंठन
कम ब्लीडिंग
गहरे रंग का रक्त
ब्लड क्लॉट्स
कब्ज
गैस और पेट फूलना
अनिद्रा और चिंता
पित्त दोष बढ़ने पर
अधिक ब्लीडिंग
जलन का अनुभव
चमकीला लाल रक्त
स्तनों में दर्द
मुंहासे
चिड़चिड़ापन
एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं का खतरा
कफ दोष बढ़ने पर
शरीर में भारीपन
पानी रुकना (Water Retention)
पेट फूलना
सुस्ती
पीरियड्स के अंतिम दिनों में दर्द
सिस्ट या फाइब्रॉइड बनने की संभावना
वात असंतुलन होने पर
गर्म, हल्का मसालेदार और सुपाच्य भोजन करें।
ठंडी, सूखी और कच्ची चीजों से बचें।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां
शतावरी
शतावरी को महिलाओं के लिए सबसे बेस्ट हर्ब माना गया है। यह गर्भाशय को पोषण देने, अनियमित पीरियड्स, दर्द और अत्यधिक ब्लीडिंग में सहायक मानी जाती है।
एलोवेरा
एलोवेरा, जिसे संस्कृत में घृतकुमारी कहा जाता है, शरीर को ठंडक पहुंचाने और तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। इसे मासिक धर्म और मेनोपॉज के दौरान लाभकारी माना जाता है।
अशोक
अशोक की छाल लंबे समय से महिलाओं के स्वास्थ्य में उपयोग की जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह अधिक ब्लीडिंग, दर्द, गर्भाशय की कमजोरी तथा सिस्ट और फाइब्रॉइड जैसी परेशानियों में मदद करती है।
गुलाब
गुलाब की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को शीतलता प्रदान करती है। यह दर्द, अधिक रक्तस्राव और पीएमएस के दौरान होने वाली समस्याओं में मदद करती है।
